उड़ान के दौरान यात्रियों को अधिकतम कितनी मात्रा में शराब दी जाए, इस सवाल को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने अपना जबाव सुप्रीम कोर्ट को दिया है।
क्या कहा DGCA ने?
नशे में धुत्त यात्रियों से निपटने के लिए एक SOP के तत्काल गठन की मांग करने वाली 72 वर्षीय महिला (जिस पर न्यूयॉर्क-दिल्ली उड़ान में एक सह-यात्री ने पेशाब कर दिया था) की याचिका का जवाब देते हुए DGCA ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक हलफनामे में कहा है कि सिविल ‘अनियंत्रित यात्रियों से निपटने’ के लिए सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) मौजूद हैं।
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, विमान में परोसे जाने वाली शराब की सीमा पर, डीजीसीए ने कहा कि सीएआर के क्लॉज 4.3 के अनुसार, यह हर एयरलाइन का विवेक है कि वह एक पॉलिसी तैयार करे ताकि यात्रियों को नशे में न छोड़ा जाए, जिससे उनके उपद्रव करने का खतरा बढ़ जाए।
बुजुर्ग महिला ने याचिका में क्या कहा?
72 वर्षीय महिला ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह डीजीसीए को निर्देश दे कि वह फ्लाइट पर अनियंत्रित/विघटनकारी व्यवहार से सख्ती से निपटने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ एसओपी और नियम बनाए। साथ ही सभी एयरलाइनों में भी इस पॉलिसी को लागू किया जाए। इसी याचिका पर DGCA की तरफ से हलफनामा दायर किया गया है।
एयर इंडिया पर लगाया आरोप
महिला ने एयर इंडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि एयरलाइन के क्रू मेंबर्स ने इस संवेदनशील मुद्दे को लापरवाही से निपटाने में लापरवाही बरती।
महिला ने कहा कि पहले क्रू मेंबर्स ने आरोपी सह-यात्री को अत्यधिक हार्ड ड्रिंक परोसी और फिर उस पर उसके साथ समझौता करने के लिए दबाव डाला। इसके अलावा, पुलिस को घटना की रिपोर्ट करने के अपने कर्तव्य में भी असफल रहे।