रत्नागिरि गैस एंड पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से मशहूर दाभोल परियोजना में पिछले हफ्ते फिर से एक टरबाइन ने काम करना बंद कर दिया है।
इसकी वजह से बिजली उत्पादन में कमी आ गई है और कंपनी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह नामचीन कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) द्वारा खराब मशीनों की आपूर्ति को बताया जा रहा है।
रत्नागिरि के एक अधिकारी 10 दिन पहले ही टरबाइन के काम न करने की पुष्टि कर चुके हैं। वह कहते हैं, ‘संयंत्र बहुत मुश्किल स्थिति में है। कंपनी इस तरह से नहीं चल सकती। इस तरह एक टरबाइन के काम न करने से हमें 50 से 200 करोड़ रुपयों तक का नुकसान होता है।’
यह संयंत्र तीन ब्लॉक में बंटा हुआ है जिसमें प्रत्येक ब्लॉक में 2 गैस टरबाइनें हैं। इनमें से 2 टरबाइन ही पूरी तरह से सही काम कर रही हैं। जिसकी वजह से संयंत्र से बिजली उत्पादन घटकर 300 से 600 मेगावाट रह गया है जबकि संयंत्र की कुल क्षमता 2,000 मेगावाट की है।
2005 में जब से इस परियोजना को दोबारा शुरू किया गया है तब से पांच बार इसके गैस टरबाइन धोखा दे चुके हैं।
जिस टरबाइन ने इस बार काम करना बंद किया है उसको जीई की सिंगापुर कार्यशाला में पहले भी एक बार भेजा जा चुका है लेकिन इसके दोबारा काम बंद कर देने से कंपनी के सामने बड़ी समस्या पैदा हो गई है।
अब जनरल इलेक्ट्रिक की काम करने की प्रक्रिया को ही लेकर सवालिया निशान लग रहे हैं। बिजली उत्पादन का लक्ष्य भी पूरा होता नहीं दिख रहा।
छा गई धुंध
2005 से छठी टरबाइन हुई फेल
जीई से 6 गैस टरबाइन में केवल 2 सही
क्षमता 2,150 मेगावाट की, 300 मेगावाट उत्पादन में कमी
परियोजना बहाली का खर्चा 10 हजार से बढ़कर 12 हजार करोड़ हुआ