अमेरिकी औषधि निर्माता कंपनी फाइजर ने गुरुवार को कहा कि वह मौजूदा कोविड महामारी के दौरान भारत में अपना एमआरएनए आधारित कोविड-19 टीका नहीं बनाएगी। कंपनी ने कहा कि उसने अमेरिका और यूरोप में दो स्थानों पर दो विशेष आपूर्ति शृंखला स्थापित की हैं। इन दोनों स्थानों पर पहले से टीकों का उत्पादन होता रहा है।
बुधवार को कुछ रिपोर्ट आई थीं जिनमें कहा गया था कि फाइजर ने भारत सरकार से कहा है कि यदि उसे तेज नियामकीय मंजूरी प्रदान की जाए और कीमत और निर्यात के क्षेत्र में स्वतंत्रता दी जाए तो वह भारत में कोरोनावायरस का टीके का उत्पादन कर सकती है। फाइजर के प्रवक्ता ने कहा, ‘फाइजर ने दो मौजूदा टीका उत्पादन संयंत्रों में दो विशेष आपूर्ति शृंखला तैयार की हैं जो क्रमश: अमेरिका और यूरोप में स्थित हैं। इन्हीं संयंत्रों में पूरे विश्व के लिए टीके तैयार किए जाएंगे। फिलहाल तो कंपनी की यही नीति जारी रहेगी। इस समय हम कहीं और स्थानीय स्तर पर टीका उत्पादन के बारे में चर्चा नहीं कर रहे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि एक बार महामारी के दौरान आपूर्ति का सिलसिला समाप्त होने और नियमित आपूर्ति शुरू होने पर फाइजर अतिरिक्त उपलब्ध अवसरों का अवश्य आकलन करेगी।
फाइजर और बायोनटेक एसई ने बुधवार को कहा कि इजरायल से आने वाले आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि उनका कोविड-19 टीका संक्रमण के लक्षणों की रोकथाम में 94 प्रतिशत प्रभावी है और यह संक्रमण का प्रसार कम कर सकता है। टीका नहीं लगवाने वालों में कोविड-19 के लक्षण होने का जोखिम 44 गुना अधिक है जबकि टीका लगवा चुके लोगों की तुलना में ऐसे लोगों की मौत होने की आशंका 29 गुना अधिक है। फाइजर पहली ऐसी टीका निर्माता कंपनी है जिसने भारत में अपने टीके के इस्तेमाल को आपात मंजूरी देने का आवेदन किया था। भारतीय औषधि नियामक का मानना है कि कंपनी को भारतीय आबादी पर चिकित्सकीय परीक्षण करना होगा ताकि टीके की प्रतिरोधक क्षमता और सुरक्षा का पता लगाया जा सके। बाद में फाइजर ने अपना आवेदन वापस ले लिया था।
हालांकि कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि भारत समेत दुनिया भर के लोगों को समान और उचित रूप से कोविड-19 टीका मिले। हम कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए सरकार के साथ सहयोग के अवसरों का भी स्वागत करते हैं।’