सिप्ला की अफ्रीका में निर्यात की गति तेज हो सकती है, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका की दवा बनाने वाली कंपनी एडकॉक इनग्राम हेल्थकेयर सिप्ला मेडप्रो को खरीदने की योजना बना रही है।
मालूम हो कि अफ्रीका महादेश सिप्ला का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी दवा बनाने वाली कंपनी एडकॉक ने 23 करोड़ 30 लाख डॉलर में सिप्ला मेडप्रो के अधिग्रहण की योजना बना रही है।
अधिग्रहण के बाद एडकॉक दक्षिण अफ्रीकी बाजार में सिप्ला की बिक्री पर नियंत्रण रखेगी। सिप्ला मेडप्रो और एडकॉक के बीच 20 साल का आपूर्ति कॉन्टै्रक्ट है। सिप्ला मेडप्रो को 2005 में एक दूसरी अफ्रीकी कंपनी एनालेनी फार्मास्युटिकल ने खरीदी थी। सिप्ला मेडप्रो में सिप्ला की हिस्सेदारी नहीं है। बाद में एनालेनी फार्मा का विलय सिप्ला मेडप्रो में हो गया।
एडकॉक के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी जोनाथन लॉयू ने बिानेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘यह विलय सिप्ला और एडकॉक दोनों के लिए अच्छा होगा। एडकॉक-सिप्ला मेडप्रो की दक्षिण अफ्रीकी बाजार में 25 फीसदी हिस्सेदारी है।’ उन्होंने कहा कि हम सिप्ला की शोध और विकास और निर्माण इकाई पर भी नजर रखे हुए हैं।
लॉयू ने कहा कि एडकॉक मौजूदा मार्के टिंग साझेदारी के संबंध में भविष्य की नीतियां तय करने के लिए सिप्ला से बातचीत भी कर रही है। सिप्ला अपने कुल 4429 करोड़ रुपये के कारोबार का 34 फीसदी हिस्सा अफ्रीका में निर्यात करती है। इसमें एचआईवीएड्स की जेनरिक दवाओं की बिक्री प्रमुख तौर पर होती है। इस पूरे वितरण का आधा हिस्सा तो मेडप्रो के जरिये की जाती है।
सिप्ला के संयुक्त प्रबंध निदेशक अमर लुल्ला ने कहा, ‘इस अधिग्रहण से हमारी आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दक्षिण अफ्रीका और अन्य अफ्रीकी देशों में दवाओं की आपूर्ति करने के लिए कंपनी की अपनी व्यवस्था मौजूद है। अगर एडकॉक इनग्राम मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखती है, तो आपूर्ति भी जारी रहेगी।’ हालांकि उन्होंने सिप्ला मेडप्रो में एडकॉक की कितनी हिस्सेदारी होगी, के सवाल पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
सिप्ला मेडप्रो का प्रिस्क्रिप्शन बाजार के एक बड़े हिस्से पर कब्जा है, जबकि एडकॉक आसानी से मिलने वाली (ओवर-द-काउन्टर : ओटीसी) दवाओं और अस्पताल उत्पादों के बाजार की नंबर एक कंपनी है। एडकॉक इनग्राम की साझेदारी बेंगलुरु की कंपनी मेडरिक के साथ भी सात साल पुरानी है। एडकॉक ने 18 महीने पहले इस कंपनी के साथ बेंगलुरु में एक संयुक्त वेंचर भी बनाया है।
यहां दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीका के अन्य हिस्सों के लिए ओटीसी दवाओं का निर्माण किया जाता है। जोनाथन ने कहा कि अगर प्रस्तावित साझेदारी होती भी है, तो मौजूदा लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।