कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट), जो तकरीबन सात करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है, ने कहा कि उसने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के चेयरमैन अशोक कुमार गुप्ता के साथ मुलाकात की मांग की है ताकि वर्टिकल अरेंजमेंट के जरिये पसंदीदा विके्रेताओं के माध्यम से मूल्य निर्धारण और कैपिटल डंपिंग के मामले में कॉमर्स फर्म एमेजॉन और फ्लिपकाट के खिलाफ शीघ्र जांच और उसके परिणाम के अनुरूप कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया जा सके। कैट ने कहा कि यह पता चला है कि सीसीआई ने उस अधिकारी को बीच में ही स्थानांतरित कर दिया है, जो एमेजॉन की जांच कर रहा था, जिसने देश के व्यापारिक समुदाय को परेशान किया है।
कैट ने कहा कि 13 फरवरी, 2020 को सीसीआई ने अपने महानिदेशक (जांच) को फ्लिपकार्ट और एमेजॉन के खिलाफ जांच करने और 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। हालांकि एमेजॉन और फ्ल्पिकार्ट दोनों ने उस आदेश को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी और उस पर रोक लगवा ली। कैट ने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दिनांक 23-07-2021 के अपने आदेश में सीसीआई के पक्ष में और एमेजॉन तथा फ्ल्किार्ट के खिलाफ अंतिम आदेश पारित किया और जांच जारी रखने की अनुमति दी। इसने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी एमेजॉन और फ्लिपकार्ट द्वारा दी गई चुनौती में कोई आधार नहीं पाया।