अप्रैल में इस्पात और सीमेंट कंपनियों की क्षमता उपयोगिता में भारी गिरावट के बाद मई में उल्लेखनीय सुधार दिखा है। घरेलू मांग में कुछ हद तक सुधार होने, निर्यात और लॉकडाउन में ढील दिए जाने से निजी क्षेत्र की प्रमुख इस्पात कंपनियों के उत्पादन में सुधार हुआ है। यही कारण है कि निजी क्षेत्र की इस्पात कंपनियों के संयंत्रों में 70 से 100 फीसदी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल हो रहा है। सीमेंट कंपनियों ने भी कुछ हद तक अपनी क्षमता उपयोगिता बढ़ाई है और अब करीब 60 फीसदी क्षमता उपयोगिता पर परिचालन कर रही हैं।
अप्रैल में आठ प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में सबसे अधिक गिरावट इस्पात और सीमेंट क्षेत्र में दिखी। महीने के दौरान इस्पात और सीमेंट क्षेत्र के उत्पादन में 80 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि पहले चरण के अनलॉक के दौरान घरेलू मांग में सुधार होने की उम्मीद है।
टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि कंपनी फिलहाल 70 फीसदी उत्पादन स्तर पर परिचालन कर रही है और करीब 50 फीसदी उत्पादन निर्यात पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, ‘घरेलू बाजार में मांग फिलहाल ग्रामीण बाजारों, तेल एवं गैस और रूफिंग एवं शीटिंग जैसी बी2बी श्रेणियों से संचालित हो रही है।’
जेएसडब्ल्यू स्टील ने भी अपना उत्पादन करीब 85 फीसदी तक बढ़ा दिया है। जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं ग्रुप सीएफओ शेषागिरि राव ने कहा कि अप्रैल में घरेलू बाजार में इस्पात की मांग 90 फीसदी कम रही। इसलिए बिक्री में अधिकांश हिस्सा निर्यात का रहा। उन्होंने कहा, ‘मई में मांग में सुधार दिख रहा है और वह बढ़कर 25 से 30 फीसदी तक हो चुकी है जो अप्रैल में 10 फीसदी थी।’
जिंदल स्टील ऐंड पावर (जेएसपीएल) के प्रबंध निदेशक वीआर शर्मा ने उम्मीद जताई कि जून में घरेलू मांग में और तेजी आएगी। मई में कंपनी ने अपने उत्पादन का 65 फीसदी हिस्सा निर्यात किया लेकिन शर्मा को उम्मीद है कि जून में यह आंकड़ा 50 फीसदी तक नीचे आ जाएगा। जेएसपीएल अपनी पूरी क्षमता के साथ परिचालन कर रही है। उन्होंने कहा, ‘इंजीनियरिंग क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने अपना परिचालन सुचारु कर लिया है। जून में घरेलू मांग में और सुधार होगा।’
आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) भी अप्रैल और मई के आरंभ में अपने उत्पादन में कटौती करने के बाद अब पूरी क्षमता से परिचालन कर रही है।
सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) फिलहाल करीब 50 फीसदी उत्पादन क्षमता पर परिचालन कर रही है। सेल के चेयरमैन अनिल चौधरी ने कहा कि घरेलू मांग में तेजी आ रही है। उन्होंने कहा, ‘लॉकडाउन में छूट के साथ ही घरेलू मांग में आगे और सुधार होगा। जुलाई तक के लिए हमारा निर्यात ऑर्डर बुक भर चुका है।’
इस्पात उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि अप्रैल में 94 फीसदी उत्पादन छह प्रमुख कंपनियों द्वारा किया गया। इसका मतलब यह हुआ कि द्वितीयक उत्पादकों के संयंत्र बंद हो गए अथवा वे अपना उत्पादन सुचारु करने में समर्थ नहीं थे। हालांकि उसके बाद कई द्वितीयक उत्पादकों ने उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है।
जहां तक सीमेंट कंपनियों का सवाल है तो लॉजिस्टिक संबंधी बाधाओं में सुधार और श्रमिकों की उपलब्धता बढऩे से मई में उत्पादन स्तर बढ़ाने में मदद मिली। लॉकडाउन में दी गई अधिक रियायत के मद्देनजर जून में भी उत्पादन बढऩे की उम्मीद है। श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक एचएम बांगुर ने कहा, ‘मई में सुधार होने की उम्मीद की गई थी क्योंकि मांग परिदृश्य को देखते हुए उत्पादन को सुचारु किया गया है। कुछ संयंत्रों में क्षमता उपयोगिता का स्तर अब 60 फीसदी तक पहुंच चुका है।’
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, वार्षिक मांग में 55 फीसदी योगदान करने वाली व्यक्तिगत मकान (आईएचबी) श्रेणी में राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न निर्माण गतिविधियों की अनुमति दिए जाने से सुधार दिख रहा है। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, ‘मार्च-अप्रैल से ही हम समझ चुके हैं कि यह वैश्विक महामारी का प्रकोप काफी हद तक शहरों में है और इसका अधिकांश प्रभाव शहरी क्षेत्रों में महसूस किया गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत मकान निर्माण गतिविधियों और कुछ सरकार प्रायोजित निर्माण गतिविधियों से मांग को रफ्तार मिली है।’
इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत मकान निर्माण में कार्यरत मजदूर मुख्य तौर पर स्थानीय हैं जबकि शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार के श्रमिक प्रवासी हैं जो फिलहाल अपने घर वापस जा रहे हैं। इसके अलावा स्थानीय श्रमिकों को रोजगार देने वाली मनरेगा योजना के तहत सड़क एवं सिंचाई जैसी सरकारी परियोजनाओं से भी मांग को रफ्तार मिली है।