उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में पीतल निर्माण इकाइयों के लिए बेहतर विपणन सुविधाएं मुहैया कराने के लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने हाल ही में इस क्षेत्र में एक मार्केटिंग हब के लिए 70 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है।
मुरादाबाद क्षेत्र से होने वाला निर्यात लगभग 3,000 करोड़ रुपये सालाना है जिसमें लगभग 1600 निर्यातक एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच), नई दिल्ली के साथ पंजीकृत हैं।
ऑफिस ऑफ डेवलपमेंट कमिश्नर (हैंडीक्राफ्ट्स), भारत सरकार के सहायक निदेशक भूपेन्द्र सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘मुरादाबाद में मार्केटिंग हब विकसित करने के लिए एक स्पेशल पर्पज वेहीकल (एसपीवी) गठित किया जाएगा।’
प्रस्तावित हब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों और विक्रेताओं के लिए कारोबार को बढ़ावा देने के लिए एक मंच मुहैया कराएगा। उधर दिल्ली हाट की तर्ज पर लखनऊ हाट के निर्माण की प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाएगी।
लखनऊ हाट विभिन्न राज्यों के कारीगरों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने और सांस्कृतिक एवं लोक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक स्थाई एवं लोकप्रिय ठिकाना मुहैया कराएगा।
लखनऊ हाट परियोजना पिछले लगभग 6 साल से प्रस्तावित है। इससे पहले ओल्ड लखनऊ में ऐसे हाट की योजना तैयार की गई थी। लेकिन यह क्षेत्र हेरिटेज जोन में आता है और वहां किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है।
उन्होंने बताया, ‘लखनऊ हाट के लिए नए लोकेशन के तौर पर ट्रांस-गोमती इलाके पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार से बातचीत की जा रही है।’
इसके अलावा इसी तरह के हाट वाराणसी और बरेली में भी बनाए जाएंगे। आगरा में ताजमहल के पास ऐसा ही एक हाट पहले ही काम शुरू कर चुका है।
सिंह के मुताबिक ऐसे हाट के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभागों द्वारा सामूहिक रूप से आर्थिक मदद मुहैया कराई जाती है।
राज्य सरकार सार्वजनिक एवं निजी कोष की मदद से विभिन्न औद्योगिक और हैंडीक्राफ्ट क्लस्टरों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स भी स्थापित कर रही है। उदाहरण के लिए, राज्य सरकार विश्वविख्यात कार्पेट हब भदोही में 9 करोड़ रुपये की लागत से ऐसा ही एक फैसिलिटी सेंटर स्थापित कर रही है।
यूपी एक्सपोर्ट प्रमोशन ब्यूरो के संयुक्त निर्यात आयुक्त प्रभात कुमार ने बताया, ‘यह केंद्र सामूहिक तौर पर उत्पादन के लिए भदोही के कालीन निर्माताओं को यांत्रिक उत्पादन और ड्राइंग फैसिलिटी मुहैया कराएगा।’
देश से किए जाने वाले कुल सालाना हस्तशिल्प निर्यात, जिसमें कालीन भी शामिल हैं, में उत्तर प्रदेश की 60 फीसदी की भागीदारी है। अनुमानित रूप से राज्य में 18 लाख कारीगर हस्तशिल्प क्षेत्र में काम कर रहे हैं और कुल सालाना उत्पादन 19,000 करोड़ रुपये का है।