महिंद्रा समूह की कंपनी टेक महिंद्रा सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के करीब पहुंची, तो कई लोगों की पेशानियों पर पड़े बल ढीले पड़ गए हैं।
बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने से कई लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं निजाम बदलने यानि नये मालिक के आने से सत्यम के कर्मियों के दिमाग में कुछ सवाल भी घूम रहे हैं।
इनमें से कुछ को लगता है कि मौजूदा हालात में उनकी नौकरी पर तलवार लटक सकती है तो वहीं कुछ का मानना है कि इससे कंपनी की खोई साख वापस आएगी और उनकी नौकरी को कोई नुकसान नहीं होने जा रहा है। वहीं सत्यम से ऑफर लेटर पाये 6,000 फ्रेशर्स भी उम्मीदें लगाए बैठे हैं।
सत्यम के हैदराबाद कैंपस में कार्यरत एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, ‘ताजा परिस्थितयों में हालात डरावने से लग रहे हैं। आइटी सेक्टर और बाजार की हालत भी अनिश्चित है। सत्यम की बिक्री प्रक्रिया के दस्तावेज में भी केवल 100 आला अधिकारियों की एक साल की नौकरी की ही गारंटी है।’
सत्यम के साथ पांच साल से जुड़ी हुई श्वेता (काल्पनिक नाम) को भी अपनी नौकरी पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। वह कहती हैं, ‘हमें अब भी अपनी नौकरी खतरे में दिखती है। टेक महिंद्रा को सत्यम की कमान संभालने में अभी एक हफ्ते का वक्त तो कम से कम लगेगा ही। इसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि नई टेक महिंद्रा का हमारे प्रति क्या रवैया रहेगा।’
लेकिन काफी लोग इस कदम से खुश भी हैं। सत्यम में ही काम करने वाले प्रसाद कहते हैं कि तकनीकी और वित्तीय मोर्चे पर टेक महिंद्रा दमदार कंपनी है और उन्हें नहीं लगता कि उनकी नौकरी पर कोई संकट आने वाला है, खासतौर से निकट भविष्य में तो कतई ऐसा नहीं होने जा रहा है।