महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने राज्य की ऊर्जा वितरण कंपनी महावितरण की ओर से मायटास इन्फ्रास्ट्रक्चर को आवंटित 480 करोड़ रुपये के ठेके रद्द करने के आदेश दिए हैं। चव्हाण ने दोबारा इन ठेकों का आवंटन करने को कहा है।
मालूम हो कि मायटास इन्फ्रास्ट्रक्चर रामलिंग राजू की आईटी कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स सर्विसेज लिमिटेड की सहयोगी कंपनी है। राजू की हालिया स्वीकारोक्ति के बाद समूह की सारी परियोजनाओं को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, उसने मायटास को 480 करोड़ रुपये का ठेका आवंटित की थी। यह ठेका अहमदनगर, बीड और लाटूर जिलों में सब स्टेशनों की स्थापना, बिजली वितरण और इसके पारेषण के लिए सितंबर 2008 में दिया गया था।
एक प्रेस कांफ्रेंस में चव्हाण ने बताया कि राजू की स्वीकारोक्ति और सत्यम और मायटास के विवादास्पद संबंधों के बाद उसने महावितरण को यह निविदा रद्द करने के दिए हैं। जबकि अब नए सिरे से ठेकों का आवंटन किया जाएगा।
नागपुर में सरकारी संस्था महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (एमएडीसी) द्वारा प्रवर्तित विशेष आर्थिक क्षेत्र मिहान (एमआईएचएएन) के लिए सत्यम को रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराने को चव्हाण ने हालांकि उचित ठहराया।
उनके मुताबिक, ‘जब कहीं कोई नया विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित किया जाता है तो अगुआ संस्थान को रियायती दर पर जमीन दी जाती है। ऐसा निवेश आकर्षित करने के लिए किया जाता है। इसलिए इस आवंटन में कुछ भी गलत नहीं है।’
दूसरे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह सही है कि एमएडीसी के मौजूदा चेयरमैन आर सी सिन्हा मायटास प्रॉपर्टी के भी चेयरमैन थे। लेकिन जैसे ही फर्जीवाड़ा सामने आया सिन्हा ने तुरंत मायटास प्रॉपर्टीज की अध्यक्षता छोड़ दी।