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एयर इंडिया के लिए बोली लगाएगा अमेरिकी फंड

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Last Updated- December 15, 2022 | 12:45 AM IST

सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली लगाने के मसले पर टाटा समूह ऊहापोह में फंसा है। मगर इस मामले में उसकी प्रतिस्पद्र्घी अमेरिकी फंड कंपनी इंटरप्स इंक बोली को आखिरी रूप देने में जुटा हुआ है। उसकी बोली में बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) व्यवस्था भी शामिल होगी, जिसमें विमानन कंपनी का समूचा कमाऊ बुनियादी ढांचा रहेगा।
इनविट व्यवस्था का फायदा यह होगा कि जब एयर इंडिया का निजीकरण पूरा हो जाएगा तो संस्थागत निवेशक भी उसमें निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। मगर कंपनी का मुख्य परिचालन इनविट का हिस्सा नहीं होगा।
मामले की जानकारी रखने वाले एक बैंकर ने बताया, ‘टाटा समूह बोली लगाने के बारे में कुछ तय नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसे टाटा संस में मिस्त्री परिवार की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए करीब 20 अरब डॉलर भी जुटाने हैं। विमानन कारोबार में उसके विदेशी साझेदार ने भी साझे उपक्रम यानी विस्तारा के जरिये निवेश पर चिंता जताई है। मगर दूसरे बोलीदाता आक्रामक तरीके से बोली लगाने की योजना बना रहे हैं।’ बैंकर ने कहा कि भारत सरकार को एयर इंडिया के विनिवेश से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।
इंटरप्स इंक द्वारा एयर इंडिया के मूल्यांकन का काम लगभग पूरा हो चुका है। फंड ने बोली में शामिल होने और इनविट में निवेश करने के लिए भारतीय बैंकों और निवेशकों से बातचीत शुरू कर दी है। मगर इंटरप्स इंक ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
इनविट भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी निवेशकों से पैसे जुटाने का आकर्षक माध्यम है। देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना समूचा दूरसंचार टावर कारोबार और उससे जुड़ा कर्ज 25,215 करोड़ रुपये में ब्रुकफील्ड समर्थित इनविट को सौंप दिया। रिलायंस जियो अपने फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क को भी एक अन्य इनविट में हस्तांतरित करने की योजना बना रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) भी इनविट के जरिये अपनी सड़क संपत्तियों से कमाई कर रही है।
एयर इंडिया के लिए दिलचस्पी दिखाने वाले हिंदुजा समूह जैसे कई बोलीदाताओं ने कोरोना महामारी के कारण हाथ खींच लिए हैं। इंडिगो ने भी पहले एयर इंडिया के अंतरराष्ट्रीय परिचालन में दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन अब वह भी बोली लगाने के बारे में फैसला नहीं कर पा रही है। कंपनी ने कल एक बयान में कहा था कि फिलहाल एयर इंडिया में उसकी दिलचस्पी नहीं है।
सरकार ने अभिरुचि पत्र जमा कराने के लिए 30 अक्टूबर तक की समयसीमा रखी है। सौदे के लिए सरकार के सलाहकारों ने सुझाव दिया है कि खरीदारों के लिए एयर इंडिया को आकर्षक बनाने की खातिर उसके कर्ज को शून्य कर दिया जाए। विनिवेश योजना की घोषणा से पहले सरकार ने बोलीदाताओं को लुभाने के लिए एयर इंडिया के 60,000 करोड़ रुपये के कर्ज का एक हिस्सा परिसंपत्ति होल्डिंग कंपनी को हस्तांतरित कर दिया था।

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First Published - September 27, 2020 | 11:07 PM IST

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