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क्लास ऐक्शन : बोर्ड सदस्यों सहित सब पर चलता है अभियोग

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Last Updated- December 09, 2022 | 10:00 PM IST

क्लास ऐक्शन मुकदमा क्या है और इसे कौन दायर करता है?


क्लास ऐक्शन मुकदमा उन लोगों के समूह की ओर से दायर किया जाता है, जो कंपनी की गतिविधियों के कारण एक जैसी मुश्किलों का सामना करते हैं।

यह काफी आम है जब कंपनी के सदस्य गैर-कानूनी तरीके से नियुक्ति या वेतन देने के खिलाफ क्लास ऐक्शन मुकदमा दायर करते हैं।

इसके अलावा एक और तरह का क्लास ऐक्शन मुकदमा दवा निर्माता कंपनियों के खिलाफ अपने उत्पाद को लेकर गैर-कानूनी दावों या उसकी दवाओं का सेवन करने की वजह से मृत्यु या शारीरिक नुकसान होने के लिए किया जाता है।

इसके अलावा हवाई दुर्घटना में मृतक के रिश्तेदार एक समूह बनाकर विमानन कंपनी के खिलाफ एक सामूहिक मुकदमा दायर करते हैं।

सत्यम के मामले में, अमेरिका में सत्यम के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (एडीआर) खरीदने वाली एकता बेन पटेल ने न्यूयॉर्क के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सत्यम, बी रामलिंग राजू और बी राम राजू के खिलाफ क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया है।

क्लास ऐक्शन मुकदमे की जरूरत?

अमेरिका का कानूनी तंत्र क्लास एक्शन मुकदमे को बढ़ावा देता है। इस व्यवस्था के तहत कई असंतुष्ट लोगों की एक सामान्य कानूनी दिलचस्पी होती है और वे एक लक्ष्य के लिए मुकदमा करते हैं।

ऐसे लोगों को न्याय दिलाने और मुआवजा मुहैया कराने के लिए अदालतें रास्ता दिखाती हैं।

इसके अलावा आरोपी व्यक्ति इस स्थिति में नहीं होता कि वह न्याय के साथ छेड़छाड़ कर सके, कानूनी आखिर उसे अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इसके पीछे मकसद यह है कि समय और पैसे की बचत हो और सभी को एक जैसा फैसला मिले।

क्या भारत में भी कुछ ऐसा है?

भारत सरकार क्लास ऐक्शन को एक कानून के रूप में संहिताबध्द करने की योजना बना रही है। भारत में नए कंपनी कानून विधेयक में क्लास एक्शन मुकदमा दायर करने के क्लॉज को शामिल किया गया है।

इसे एक बार शुरू होने के बाद इस प्रावधान से कंपनियों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए शेयरधारकों को सशक्त किया जा सकेगा और कुछ भी गलत करने की जिम्मेदारी कंपनी के प्रबंधन की होगी।

प्रबंधन के खिलाफ शेयरधारकों की प्रतिनिधि या वर्ग कार्रवाई को हिंदुस्तानी अदालतें पहले भी कई बार सही मान चुकी हैं, लेकिन अब भी इसका कानून के रूप में सामने आना बाकी है।

क्या क्लास ऐक्शन मुकदमा सिर्फ एडीआर के लिए ही दायर किया जा सकता है?

हां, यह एडीआर के लिए ही होता है।


यह कैसे काम करता है?

आमतौर पर ऐक्शन मुकदमे या फिर दोस्तों, पड़ोसियों या संबंधित व्यक्तियों के साथ घटना पर हुई बातचीत के बाद शुरू होता है। अगर ऐसी ही घटना पहले भी हो चुकी हो और उस तरह की धोखाधड़ी के और भी शिकार हुए हों तो क्लास ऐक्शन मुकदमा दायर होता है।

इस तरह के मामलों में एक-सा होने की भावना विकसित होती है, जिससे एक ‘क्लास’ यानी वर्ग बनता है। इस वर्ग में वे व्यक्ति भी शामिल होते हैं, जो इसके शिकार होते हैं या जिन्हें इससे नुकसान पहुंचता है। यह नुकसान किसे कितना बड़ा या कितना अधिक हुआ, क्लास ऐक्शन मुकदमे में यह मायने नहीं रखता।

प्रारंभिक जांच के कई चरण पूरे हो जाने के बाद एक अधिवक्ता इस क्लास के किसी सदस्य के नाम से मुकदमा दायर करता है। वित्तीय या उससे संबंधित मामले में जिस व्यक्ति को कितना नुकसान हुआ है, इस आधार पर उस व्यक्ति के नाम से मुकदमा दायर होता है।

यह व्यक्ति अग्रणी प्रतिनिधि कहलाता है। दूसरे सदस्य मिलकर वर्ग बनाते हैं। अदालत सबसे पहले प्रतिवादी के अधिवक्ता की ओर से वर्ग के सदस्यों को नोटिस भेजती है। बयान लिए जाते हैं।

तब अदालत की ओर से इस मुकदमे को क्लास ऐक्शन मुकदमे का प्रमाण दिया जाता है। मुआवजे के मामले में सभी सदस्यों को एक समान समझा जाता है, जिससे सभी सदस्य मुकदमे के बाद अगर मुआवजा मिले तो उसे बराबर बांटें।

सत्यम के धोखाधड़ी मामले में अमेरिका में एडीआर धारक एक वर्ग बना सकते हैं, जिसमें दूसरों को भी शामिल होने दिया जा सके।

क्या इसमें न्यायिक मुकदमा भी होता है?

क्लास ऐक्शन मुकदमा न्यायिक मुकदमा भी बन सकता है या मुकदमे से पहले ही इसका निपटारा हो सकता है। निपटारा और बीच-बचाव का मतलब है कि प्रतिवादी की ओर से हर्जाने को स्वीकार कर लिया गया है।

न्यायिक क्लास ऐक्शन मुकदमा मुसीबत पैदा कर सकता है, क्योंकि भारी दंड और मुआवजे के चलते कंपनी अपील कर सकती है।  इसलिए किसी भी तरह का मुआवजा मिलने से पहले वादियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

साथ ही कंपनियां खुद को दिवालिया घोषित कर सकती हैं, जिसका मतलब है कि वादियों को कभी कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। यहां दो से तीन साल का न्यायिक मुकदमा होता है।

क्या कंपनियों के बीमे में क्लास ऐक्शन मुकदमा भी कवर होता है?

कंपनी ने किस तरह का बीमा कवर लिया है, यह उस पर निर्भर है।


पेशेवर क्षतिपूर्ति बीमा पॉलिसी विशेशतौर पर ऑडिट और कानुनी फर्मों से ली गई सलाह जैसी चीजों के लिए कवर मुहैया कराती है और साथ ही यह कंपनी में कुछ अधिकारियों की गलत कार्रवाई के खिलाफ भी कवर देती है।

हालांकि कंपनी की ओर से अपनी इच्छा और गलत नीयत से की गई धोखाधड़ी इसमें शामिल नहीं होती।

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First Published - January 14, 2009 | 11:34 PM IST

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