मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में विप्रो के करीब 1,200 कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के आदेश दिए गए।
कंपनी के मुताबिक, दूसरी तिमाही में कर्मचारियों के निष्कासन के सिलसिले ने जो रफ्तार पकड़ी है, वह कम से कम अगली दो तिमाहियों तक जारी रहेगी।
विप्रो में एचआर मामलों के कॉरपोरेट उपाध्यक्ष प्रतीक कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘आंकड़ों के लिहाज से देखें तो साल की तीसरी तिमाही में कर्मचारियों की छंटनी की दर जहां 2 फीसदी रही, वहीं इससे पहले की तिमाही में यह 2.5 फीसदी रही थी।
आने वाले दिनों में मुझे उम्मीद है कि छंटनी की यह दर इसी तरह बनी रहेगी। कम से कम जुलाई तक तो इसमें कमी की उम्मीद नहीं है।’
छंटनी के अलावा स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने वालों की संख्या तीसरी तिमाही के दौरान 11.9 फीसदी रही है। तीसरी तिमाही में हुई कमी के चलते मौजूदा वित्त वर्ष में दूसरी बार कर्मचारियों की संख्या कम हुई है।
उल्लेखनीय है कि कंपनी ने कर्मचारियों के प्रदर्शन और निष्ठा पर गंभीरता से गौर करना तब शुरू किया जब दूसरी तिमाही में स्वेच्छा से कंपनी छोड़नेवालों की दर 0.5 फीसदी से बढ़कर 2.5 फीसदी हो गई थी। उससे पहले की तीन तिमाहियों में यह दर 0.5 से 0.8 फीसदी के बीच झूलती रही थी।
मौजूदा कठिन आर्थिक हालात को देखते हुए अब हर आईटी संस्थान कर्मचारियों की साख और प्रदर्शन को लेकर गंभीर हो गए हैं। देश की दूसरी बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाता कंपनी इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज में तीसरी तिमाही के दौर कर्मचारियों की छंटनी दर 1.5 फीसदी हो गई।
इस दौरान इन्फोसिस ने करीब 1,800 कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के आदेश दिए हैं। कंपनी ने हालांकि कहा कि यह दर इसलिए ज्यादा हुई कि प्रशिक्षुओं की बड़ी तादाद कंपनी द्वारा लिए गए टेस्ट में उत्तीर्ण न हो सके। आईटी उद्योग की मौजूदा प्रवृत्ति का अनुसरण करते हुए विप्रो ने भी खर्च घटाने के कई उपाय किए हैं।
आईटी में मंदी का वायरस
इन्फोसिस में भी हुई 1.5 फीसदी की छंटनी
अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही तक जारी रहेगी छंटनी
कंपनी ने कर्मचारियों से खर्च घटाने को कहा
लागत कम करने के उपायों के तहत कर्मचारियों पर गाज