मसालों की कीमतों में आ रही तेजी पर अब ब्रेक लग गया है। इस सप्ताह इनकी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कमोडिटी एक्सपर्ट का कहना है कि इस महीने पिछले सप्ताह तक मसालों के दाम काफी बढ़ गए थे और अब मुनाफावसूली के कारण इनके दाम सुस्त पड़ गए हैं। मॉनसून सुधरने से भी मसालों की कीमतों में गिरावट को बल मिला है। हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि लॉन्ग टर्म में इनकी कीमतों में तेजी का रुख बना रह सकता है।
कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर हल्दी का अगस्त कॉन्ट्रैक्ट सोमवार (20 जुलाई) को 21,492 रुपये पर बंद हुआ था, शुक्रवार (24जुलाई) को यह गिरकर 20,720 रुपये के भाव पर दिन के निचले स्तर तक चला गया। इसी अवधि में धनिया का अगस्त कॉन्ट्रैक्ट 16,298 रुपये से घटकर 15,460 रुपये प्रति क्विंटल रह गया, जबकि इस दौरान जीरा अगस्त कॉन्ट्रैक्ट 21,285 रुपये से घटकर 20,950 रुपये प्रति क्विंटल तक फिसल गया।
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कमोडिटी एक्सपर्ट और एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल में रिसर्च हेड इंद्रजीत पॉल ने कहा कि बीते एक महीने मसालों के दाम तेजी से बढ़ रहे थे। हल्दी की बात करें तो एक महीने में इसके भाव करीब 5,000 रुपये क्विंटल चढ़ चुके हैं। भाव काफी चढ़ने के बाद मुनाफावसूली देखने को मिली। जिससे हल्दी के दाम में कुछ गिरावट आई है। धनिया के भाव भी तेजी के बाद अब मुनाफावसूली के कारण गिर गए हैं। जीरे के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई है।
कमोडिटी एक्सपर्ट रविशंकर पांडेय ने कहा कि बीते कई दिनों से मसालों के भाव तेजी से भाग रहे थे। अब मुनाफावसूली के कारण मसालों के भाव गिरे हैं। इसके साथ ही मॉनसून सुधरने से अगली फसल घटने की आशंका थोड़ी कमजोर पड़ गई है। इससे भी मसालों में फिलहाल गिरावट देखने को मिली है।
एक्सपर्ट का मानना है कि आगे मसालों की कीमतों में मजबूती आ सकती है। पॉल ने कहा कि अभी भले मुनाफावसूली के कारण मसालों की कीमतों में गिरावट आई हो, लेकिन आगे का ट्रेंड मजबूती का लग रहा है क्योंकि अगले महीने शुरू हो रहे त्योहारी सीजन में इनकी मांग बढ़ सकती है, जबकि आपूर्ति को लेकर चिंताएं बरकरार हैं। पांडेय का भी मानना है कि लॉन्ग टर्म में मसालों के दाम तेज रह सकते हैं। अभी कीमतों में गिरावट मुनाफावूसली के कारण आई है। लेकिन फंडामेंटल अभी भी मजबूत नजर आ रहे हैं।