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रुपये में 6 हफ्ते की सबसे बड़ी उछाल: डॉलर के मुकाबले 70 पैसे मजबूत होकर 95.89 पर बंद

थाई बाहत, ताइवान डॉलर और फिलिपींस पेसो में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी से लेकर 0.4 फीसदी के बीच बढ़त देखी गई

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- July 27, 2026 | 10:05 PM IST

रुपये में सोमवार को करीब छह हफ्तों की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त देखी गई। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और विदेशी निवेश के लगातार आने से बाजार का मूड बेहतर हुआ जबकि भारतीय रिजर्व बैंक भी अपना विदेशी मुद्रा भंडार फिर से बढ़ाने के लिए डॉलर खरीदता नजर आया। 

घरेलू मुद्रा 95.89 प्रति डॉलर पर बंद हुई। यह एक दिन पहले के बंद भाव 96.57 से 0.70 फीसदी ज्यादा है। यह 5 जून के बाद रुपये में एक दिन में सबसे बड़ी बढ़त है। तब उसमें 0.90 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। रुपये ने एशियाई मुद्राओं से बेहतर प्रदर्शन किया। थाई बाहत, ताइवान डॉलर और फिलिपींस पेसो में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.3 फीसदी से लेकर 0.4 फीसदी के बीच बढ़त देखी गई।

रुपये में यह बढ़ोतरी तब हुई जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.6 फीसदी गिरकर लगभग 86.3 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल में यह 25 मई, 2025 के बाद से एक दिन में सबसे तेज गिरावट थी। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंता कम हुई, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति में रुकावट की आशंकाएं घट गई हैं।  

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, क्रूड की कीमतों में आई तेज गिरावट से रुपये को तुरंत राहत मिली जबकि डेट और एफसीएनआर (बी) से जुड़े डॉलर की लगातार आवक ने बाजार के मनोबल को बेहतर बनाया। सोमवार की तेजी के बावजूद कैलेंडर वर्ष 2026 में डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक 6.3 फीसदी कमजोर हुआ है। इस कारण वह इस साल एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गया है। ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद से मुद्रा में 5.1 फीसदी की गिरावट आई है। 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, केंद्रीय बैंक के समय पर हस्तक्षेप और नीतिगत उपायों के कारण भारतीय रुपया एशिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। इन उपायों ने विदेशी निवेशकों का डॉलर निवेश प्रभावी तरीके से बहाल किया है।परमार ने कहा, वैश्विक बाजार की स्थितियों ने इन फायदों को और बढ़ाया है। इसमें कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, डॉलर इंडेक्स में कमी और जोखिम लेने वाले माहौल की वापसी शामिल है। 

सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई और बेंचमार्क 10-साल की यील्ड 6.77 फीसदी पर रही, जो पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 5 आधार अंक कम है। मौजूदा वित्त वर्ष में बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड अब तक 26 आधार अंक कम हुई है। ट्रेडर्स का कहना है कि रुपये की आगे की चाल कच्चे तेल की कीमतों के नहीं बढ़ने, एफसीएनआर (बी) में डॉलर की रफ्तार और आरबीआई की दखल की रणनीति पर निर्भर करेगी। हालांकि महीने के आखिर में आयातकों की डॉलर मांग के कारण इसमें और बढ़त सीमित भी रह सकती है। 

First Published : July 27, 2026 | 10:05 PM IST