मंगलवार को लगातार तीसरे सत्र में रुपये में मजबूती आई। इसकी वजह कच्चे तेल की कम कीमतें और सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की लगातार बिक्री रही, जो संभवतः भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से की गई थी। डीलरों ने बताया कि बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी के कारण स्थानीय मुद्रा में बढ़त सीमित रही।
घरेलू मुद्रा 95.86 प्रति डॉलर पर बंद हुई, जबकि एक दिन पहले यह 95.89 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। कारोबारी सत्र के दौरान रुपया मजबूत होकर 95.63 प्रति डॉलर तक पहुंच गया था लेकिन तेल विपणन कंपनियों के डॉलर खरीद बढ़ाने से कारोबार के अंत तक उसने अपनी कुछ बढ़त गंवा दी।
सरकारी बैंक के एक डीलर ने बताया, आरबीआई का हस्तक्षेप सुबह से ही जारी था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से रुपये को मजबूती मिली। उन्होंने कहा, अमेरिकी फेड की बैठक के कारण डॉलर इंडेक्स में भी तेजी आई। डॉलर इंडेक्स पिछले दिन के 101.28 के मुकाबले बढ़कर 101.62 पर पहुंच गया। यह छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापता है।
डीलरों ने बताया कि निवेशक अमेरिकी जीडीपी वृद्धि और मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार कर रहे थे ताकि अमेरिकी ब्याज दरों के आगे के रुख का अंदाजा लगाया जा सके। इस कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं में बढ़त सीमित रही। मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक रुपया 1.09 फीसदी कमजोर हुआ है जबकि इस कैलेंडर वर्ष में इसमें अब तक 6.24 फीसदी की गिरावट आई है।
एचडीएफसी सिक्यो. के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, आयातित जिंसों की कीमतों में गिरावट और बैंकों से डॉलर की लगातार आपूर्ति के कारण भारतीय रुपया लगातार तीसरे सत्र में मजबूत हुआ।