चालू खरीफ सीजन में इस महीने खरीफ फसलों की बोआई में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। खरीफ फसलों के रकबा में कमी घटकर 5 फीसदी से नीचे चली गई। इससे पहले वाले सप्ताह में यह कमी 6 फीसदी थी। बोआई सुधरने की वजह उत्पादक इलाकों में बारिश होना है। अब सभी की निगाहें अगस्त में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति पर होंगी, क्योंकि यही आगे की बोआई की दिशा तय करेगा और पहले से बोई जा चुकी फसलों की स्थिति भी इसी पर निर्भर करेगी।
केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक चालू खरीफ सीजन में 24 जुलाई तक खरीफ फसलों की कुल बोआई 4.72 फीसदी घटकर 787.4 लाख हेक्टेयर रही। पहले यह कमी 6 फीसदी थी। खरीफ फसलों का रकबा सामान्य रकबा के 71 फीसदी के बराबर पहुंच गया है।
धान के रकबा में कमी और बढ़ गई है। 24 जुलाई तक धान का रकबा 2.57 फीसदी घटकर 234.43 लाख हेक्टेयर रह गया। 17 जुलाई तक यह कमी महज 0.85 फीसदी थी। 24 जुलाई तक कपास की बोआई 3.89 फीसदी घटकर 98.7 लाख हेक्टेयर रह गई। इस दौरान गन्ने का रकबा 1.50 फीसदी बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर
हो गया।
तिलहन फसलों की 24 जुलाई तक बोआई 2.77 फीसदी घटकर 154.62 लाख हेक्टेयर रही, पहले यह कमी में 5.54 फीसदी थी। सोयाबीन का रकबा करीब 3 फीसदी घटकर 113.65 लाख, मूंगफली का 1.42 फीसदी घटकर 40.20 लाख हेक्टेयर रह गया, वहीं दलहन फसलों का रकबा भी तेजी से सुधरा।
24 जुलाई तक दलहन फसलों की बोआई 7.54 फीसदी घटकर 84.57 लाख हेक्टेयर रही, जबकि 17 जुलाई तक यह कमी 15 फीसदी थी। अरहर का रकबा 11.63 फीसदी घटकर 31.17 लाख हेक्टेयर, मूंग का 5.28 फीसदी घटकर 26.89 लाख हेक्टेयर रह गया, वहीं उड़द का रकबा 8 फीसदी बढ़कर 18.67 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि 17 जुलाई तक इसमें 5.92 फीसदी कमी आई थी।
चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाजों का रकबा 11.94 फीसदी घटकर 142.21 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया। इन अनाजों में बाजरा की बोआई 14.71 फीसदी घटकर 49.54 लाख हेक्टेयर और मक्का की 9.70 फीसदी फीसदी घटकर 77.79 लाख हेक्टेयर रह गई। इस बीच, 23 जुलाई 2026 तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल स्तर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम रहा, लेकिन यह 10 वर्षों के औसत से अधिक था।
जलाशयों में पानी का स्तर उनकी पूर्ण जलाशय क्षमता का 38.37 फीसदी था, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 60.21 फीसदी से काफी कम है। हालांकि, यह 10 वर्षों के औसत 41.22 फीसदी के मुकाबले भी थोड़ा कम रहा।