facebookmetapixel
Advertisement
बाजार गिरा, लेकिन टाटा के शेयरों में तूफानी तेजी! टाटा केमिकल्स पर 20% का अपर सर्किटभारत का चालू खाता घाटा जुलाई में बढ़कर हुआ 7 अरब डॉलर, आयात बढ़ने से बना दबावHDFC Bank को जल्द मिलेगा नया CEO! दो उम्मीदवारों के नाम सौंपे, शेयर 3% तक उछलाHero Motors IPO: ₹1,000 करोड़ का इश्यू 16 सितंबर से खुलेगा, निवेश से पहले जानें ब्रोकरेज की रायरुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में लुढ़का, डॉलर के मुकाबले 95.96 पर बंद; कच्चे तेल की तेजी ने चिंताNSE IPO को मिली उम्मीद से ज्यादा मांग, उपलब्ध शेयरों से कई गुना आगे निकली निवेशकों की दिलचस्पी: CEOलोन हो सकते हैं महंगे! RBI अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 bps तक बढ़ा सकता है रीपो रेटजाते-जाते भी जमकर बरसेंगे बादल: 19 सितंबर से मॉनसून की विदाई, खरीफ फसलों को मिलेगी बड़ी राहतशेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 778 अंक धड़ाम, निफ्टी 5 महीने के निचले स्तर परफॉरेक्स में रूस से आगे निकला भारत, फिर भी डॉलर के मुकाबले क्यों 95 के पार पहुंचा रुपया?

घटने लगे आलू-प्याज के दाम

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 11:10 AM IST

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के आलू किसान प्रदीप शर्मा को लगता है कि आलू की कीमत में तेज गिरावट बड़े स्टॉकिस्टों और गोदाम मालिकों की करतूत है। शर्मा के मुताबिक स्थानीय नेताओं से मिलकर इन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि गोदामों के स्टॉक को बाजार में पाट दिया जाए और ताजा फसल न खरीदी जाए। 
बिजनेस स्टैंडर्ड से फोन पर बातचीत में शर्मा ने कहा कि बीते पखवाड़े से लेकर अब तक आलू की कीमत में करीब 50 प्रतिशत गिरावट आई है। इसकी एक ही वजह है कि कोल्ड स्टोरेज के मालिक और वेयरहाउस संचालक जगह की कमी का तर्क देकर किसानों से आलू नहीं खरीद रहे हैं। 

शर्मा ने कहा, ‘यह सही बात है कि गोदामों में जगह नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है कि फसल समायोजित न हो सके। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से भी आलू आ रहा है, जिसकी वजह से कीमत कम है।’ शर्मा ने कहा कि पशुओं का चारा 15 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि आलू का 10 रुपये किलो भी नहीं मिल रहा है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों 3 अक्टूबर से आलू के दाम बढ़ने शुरू हुए थे। दिल्ली के खुदरा बाजार में अक्टूबर के पहले सप्ताह में आलू के दाम 30 रुपये किलो थे। फिर आलू के दाम बढ़कर नवंबर की शुरुआत में 37-38 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए थे। फिर 19 नवंबर को 24 फीसदी की गिरावट के साथ 29 रुपये प्रति किलोग्राम आ गए थे। 
व्यापारियों का कहना है कि अक्टूबर से आलू की नई फसल की बोआई शुरू हो गई है, वहीं गोदामों में भी पर्याप्त स्टॉक है। आलू, प्याज और टमाटर (टोमैटो, ऑनियन और पोटैटो) यानी टॉप कहा जाता है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार इन तीन प्रमुख सब्जियों ‘टॉप’ की कीमत नवंबर की शुरुआत से कम हुई है।
पिछले कुछ सप्ताहों से खाने के सामान के मूल्य में गिरावट शुरू हो गई है।  ऊपर से इन तीन प्रमुख सब्जियों के दामों में गिरावट होने का भी सकारात्मक असर पड़ा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में टमाटर का अधिभार 0.57         प्रतिशत, आलू का 0.98 प्रतिशत और प्याज का 0.64 फीसदी है।

हाल के आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित खाद्य वस्तुओं की महंगाई अक्टूबर में 8.33 प्रतिशत थी, जबकि इसके पहले महीने में 11.03 प्रतिशत थी। अक्टूबर के दौरान सब्जियों की महंगाई दर 17.61 प्रतिशत थी, जो सितंबर में 39.66 प्रतिशत थी। 
दिल्ली की आजादपुर मंडी के एक कारोबारी सुरिंदर बुद्धिराजा ने कहा, ‘थोक बाजार में प्याज की कीमत गुणवत्ता के मुताबिक 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल से 1,000-1,100 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं राजस्थान से प्याज की नई फसल की आवक शुरू हो गई है। हम उम्मीद करते हैं कि दिसंबर के मध्य तक कीमत कुछ बढ़ेगी और यह 2,500 से 3,000 रुपये क्विंटल तक हो सकती है। हालांकि कीमत में तेजी सीमित रहेगी क्योंकि व्यापारियों व सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है।’ 

टमाटर के बारे में व्यापारियों का कहना है कि कीमत अक्टूबर के मध्य में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी और दिल्ली में टमाटर 60 रुपये किलो था। इसकी कीमत भी पिछले कुछ सप्ताह में गिरावट आई। नवंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली के खुदरा बाजार में टमाटर का मूल्य 35-40 रुपये किलो हो गया।

Advertisement
First Published - November 20, 2022 | 10:15 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement