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बिज़नेस स्टैंडर्ड

HDFC Bank को जल्द मिलेगा नया CEO! दो उम्मीदवारों के नाम सौंपे, शेयर 3% तक उछला

HDFC Bank New CEO: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक के शेयरों में मंगलवार को 3.15 फीसदी तक की बढ़त हुई। बैंक ने बताया कि उसने मुख्य कार्याधिकारी (CEO) पद के लिए दो उम्मीदवारों के नाम सौंपे हैं।…

HDFC Bank

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Last Updated: सितंबर 15, 2026 | 10:10 PM IST

HDFC Bank New CEO: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक के शेयरों में मंगलवार को 3.15 फीसदी तक की बढ़त हुई। बैंक ने बताया कि उसने मुख्य कार्याधिकारी (CEO) पद के लिए दो उम्मीदवारों के नाम सौंपे हैं। BSE पर बैंक के शेयर 730.30 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचे, लेकिन बाद में थोड़ी गिरावट आई और 1.27 फीसदी बढ़कर 717 रुपये पर बंद हुए।

बैंक के शेयरों में यह उछाल शनिवार को बैंक द्वारा दी गई इस जानकारी के बाद आया कि उसने प्राथमिकता के क्रम में उम्मीदवारों के नाम, तीन साल के कार्यकाल के लिए प्रस्तावित वेतन शामिल है। यह नियामक की मंजूरी की शर्तों पर निर्भर करेगा।

बैंक ने यह कदम CEO और MD शशिधर जगदीशन के उस बयान के बाद उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 26 अक्टूबर, 2026 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद वे दूसरा कार्यकाल नहीं मांगेंगे। उम्मीद है कि इस कदम से एचडीएफसी बैंक के शीर्ष नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच उत्तराधिकार संबंधी निवेशकों की चिंता कम होगी।

बैंक ने उम्मीदवारों के नाम का खुलासा नहीं किया है। माना जा रहा है कि उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा बैंक के भीतर के उम्मीदवार हैं। खबरों के मुताबिक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के अनूप बागची के बाहरी उम्मीदवार होने की संभावना है।

मैक्वेरी रिसर्च का कहना है कि बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति एचडीएफसी बैंक के शेयर की दोबारा रेटिंग के लिए एक उत्प्रेरक का काम कर सकती है। वहीं जेफरीज के अनुसार निवेशकों से हुई बातचीत से पता चलता है कि शेयरधारक नेतृत्व में बदलाव के लिए तो तैयार हैं, लेकिन वे नहीं चाहेंगे कि नया सीईओ सार्वजनिक क्षेत्र के किसी बैंक का पूर्व शीर्ष अधिकारी हो क्योंकि इससे बदलाव की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

जेफरीज का कहना है कि कॉरपोरेट, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल परिसंपत्तियों में अनुभव को देखते हुए भरूचा बैंक के लिए सहज पसंद हो सकते हैं। ब्रोकरेज का कहना है कि हालांकि उनकी नियुक्ति का मतलब कम कार्यकाल भी हो सकता है, क्योंकि वह बैंक के बोर्ड में 12 साल से ज्यादा समय तक पूर्णकालिक निदेशक रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल की अवधि पर नियामकीय सीमा आ सकती है।

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