facebookmetapixel
अश्लील AI कंटेंट पर सरकार सख्त: Grok की व्यापक समीक्षा करें X, 72 घंटे में रिपोर्ट पेश करने का आदेशमहिंद्रा समूह के CEO अनिश शाह का जरूरी संदेश: बड़ा सोचो, कम करो लेकिन उसे अच्छे से क्रियान्वित करोAdani Total ने घटाई CNG और PNG की कीमतें, आम उपभोक्ताओं को मिलेगी सीधी राहतछोटे निर्यातकों को बड़ी राहत: सरकार ने ₹7,295 करोड़ का निर्यात सहायता पैकेज और ऋण गारंटी योजना का किया ऐलानदेवयानी-सफायर के विलय को मिली मंजूरी, भारत में केएफसी-पिज्जा हट के नेटवर्क को करेगा मजबूतसुप्रिया लाइफ साइंसेज ने अंबरनाथ में नई इकाई से विनियमित वैश्विक बाजारों में दांव बढ़ायाECMS के तहत 22 और प्रस्ताव मंजूर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में ₹41,863 करोड़ का निवेश!2026 में भारतीय विमानन कंपनियां बेड़े में 55 नए विमान शामिल करेंगी, बेड़ा बढ़कर 900 के करीब पहुंचेगाIndia manufacturing PMI: नए ऑर्डर घटे, भारत का विनिर्माण दो साल के निचले स्तर पर फिसलाभारत में ऑटो पार्ट्स उद्योग ने बढ़ाया कदम, EV और प्रीमियम वाहनों के लिए क्षमता विस्तार तेज

सटोरियों के लिए सरसों बना ‘सोना’

Last Updated- December 07, 2022 | 9:42 AM IST

खाद्य तेलों  के वायदा पर प्रतिबंध के बाद सटोरिए सरसों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। सरसों इन दिनों सटोरियों को सोने का दाना नजर आ रहा है।


उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है कि बाजार लाख टूट जाए, सरसों का बाजार गर्म रहेगा। पिछले दो महीनों के दौरान सरसों के वायदा भाव में हो रहे लगातार उछाल व उसके कारोबार के बढ़ते बाजार भी साफ तौर पर इस ओर इशारा करते हैं।

इस जून महीने के दौरान सरसों के वायदा कारोबार में पिछले साल जून महीने के मुकाबले लगभग 120 फीसदी का इजाफा हुआ। वही सरसों की हाजिर कीमत में एक मई से एक जुलाई के दौरान प्रति क्विंटल 125 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। नवंबर महीने के लिए सरसों का वायदा भाव 702 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच चुका है।

वायदा कारोबार से जुड़े सटोरियों के मुताबिक कृषि से जुड़ी चीजों में खाद्य तेल उनकी पहली पसंद थी। सरकार ने खाद्य तेल के वायदा पर पाबंदी लगा दी, लिहाजा तिलहनं खास कर सरसों उनकी खास पसंद हो चुकी है। उन्हें यह भी पता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत व घरेलू बाजार की मांग व स्टॉक को देखते हुए तिलहन के मामले में उन्हें हमेशा बंपर फायदा होगा।

मुख्य रूप से कृषि जिंसों का वायदा कारोबार करने वाला एक्सचेंज एनसीडीईएक्स में पिछले साल मई महीने के दौरान सरसों का कुल वायदा कारोबार 3615.50 करोड़ रुपये का रहा जो वर्ष 2008, मई के दौरान 11,050.42 करोड़ रुपये का हो गया। यानी कि दोगुने से भी ज्यादा का इजाफा। इस साल जून में यह कारोबार 10,963.73 करोड़ रुपये का हुआ जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान मात्र 4693.52 करोड़ रुपये का था। सटोरिए कहते हैं कि जो पैसे खाद्य तेल में लग रहे थे वे इन दिनों तिलहन में लग रहे हैं। जुलाई महीने के सिर्फ चार दिनों में 1346.79 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है।

सरसों की वायदा कीमत भी लगातार बढ़ती जा रही है। 2008, अप्रैल महीने के आरंभ में सरसों की वायदा कीमत 532 रुपये प्रति क्विंटल थी जो 4 जुलाई को 702 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गयी। सूत्रों का कहना है कि सरकार के पास सरसों का स्टॉक बिल्कुल नहीं के बराबर है। उधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोया व पाम ऑयल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी के कारण सरसों में भी मजबूती का रुख बरकरार है।

घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमत पिछले एक महीने के दौरान 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी है। उत्तर भारत में सरसों तेल की मांग सबसे अधिक होती है। फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन के मुताबिक भारत में सालाना 5-6 फीसदी की दर से खाद्य तेलों की मांग बढ़ती जा रही है।

First Published - July 8, 2008 | 12:24 AM IST

संबंधित पोस्ट