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धातु बाजार में मिले-जुले रुख के आसार

Last Updated- December 07, 2022 | 4:40 AM IST

इस हफ्ते आधारभूत धातुओं के कारोबार और कीमत में मिश्रित उतार-चढ़ाव होने का अनुमान जताया जा रहा है।


जबकि आर्थिक विकास की वैश्विक दर के सुस्त रहने के आकलन के बीच तांबे के कारोबार में सुस्ती आयी है। इससे तांबे की मांग में होने वाली बढाेतरी पर अंकुश लगा है। जबकि दूसरी अन्य धातुओं में तेजी आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

पिछले कुछ हफ्तों में तांबे की कीमत में काफी मजबूती आयी है और यह अभी 800 डॉलर प्रति टन तक जा पहुंचा है। तांबे की वास्तविक उत्पादन लागत की बात करें तो यह 3000 डॉलर प्रति टन है पर तांबे का मौजूदा मूल्य इसके उत्पादन लागत से 2.66 गुना ज्यादा है।

बाजार में अभी तांबे का भाव 8000 डॉलर प्रति टन तक जा पहुंचा है। जानकारों की मानें तो कच्चे तेल की कीमत के रेकॉर्ड स्तर तक पहुंचने से ही तांबे में यह तेजी आयी है। हालांकि कच्चे तेल की कीमत में पिछले कुछ दिनों से गिरावट आ रही थी पर अब फिर से इसमें तेजी आने लगी है। इससे तांबे की उत्पादन लागत में काफी वृद्धि होने का आकलन किया जा रहा है।

बांबे मेटल एक्सचेंज के अध्यक्ष सुरेंद्र मार्डिया ने बताया कि तेल के मूल्य में स्थिरता आने तक बुनियादी ढांचों के निर्माण कार्य को रोका जा सकता है। उनके मुताबिक, भारत और चीन जैसे देशों में तांबे की खपत काफी अधिक है और उम्मीद है कि वहां की सरकारों द्वारा इस मद में किए जाने वाले निवेश में कमी लायी जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि मांग में वृद्धि होने से कच्चे तेल की कीमत जल्द ही 150 डॉलर प्रति बैरल को छू जाएगी।

मालूम हो कि पिछले साल भर में कच्चे तेल में दोगुनी से भी अधिक की तेजी आ चुकी है। इसका परिणाम यह हुआ कि आधारभूत धातुओं समेत अन्य जिंसों की कीमत काफी बढ़ गयी है। रेलीगेयर इंटरप्राइजेज के कमोडिटी प्रमुख जयंत मांगलिक ने बताया कि कच्चे तेल की कीमत के बढ़ने से आधारभूत धातुओं में आया उछाल तभी थम सकता है जब तेल की मांग में कमी आ जाए।

First Published - June 9, 2008 | 12:15 AM IST

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