जुलाई में बेहतर बोआई होने के बावजूद अभी भी देश में पिछले साल के मुकाबले मक्का की बोआई करीब 10 फीसदी कम है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन में 24 जुलाई तक देश भर में मक्का का कुल रकबा 77.80 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका है, जबकि पिछले साल इस समय तक देश में 86.15 लाख हेक्टेयर में मक्के की बोआई हो गई थी। यह सामान्य अवधि के बोआई क्षेत्र से 8.35 लाख हेक्टेयर कम है। कम रकबे की वजह से उत्पादन में कमी की आशंका और अच्छी मांग के कारण मक्के के दाम बढ़ने का अनुमान है।
चालू खरीफ सीजन में मक्का का औसत क्षेत्रफल 80.77 लाख हेक्टेयर आंका गया है और अभी तक 77.80 लाख हेक्टेयर में बोआई हो चुकी है। इस तरह मक्का का बोआई क्षेत्र औसत रकबे के करीब पहुंच चुका है। कृषि मामलों के जानकारों का कहना है कि चालू सीजन में मक्के का क्षेत्रफल औसत रकबे को पार कर जाएगा, हालांकि पिछले साल के रकबे को पाना मुश्किल लग रहा है। वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में मक्का का बोआई क्षेत्र अप्रत्याशित रूप से उछलकर 98.61 लाख हेक्टेयर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
महज एक सप्ताह में मक्का के बोआई क्षेत्र में करीब 10 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कृषि मंत्रालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 17 जुलाई तक 67.89 लाख हेक्टेयर में मक्का की बोआई हुई थी, जबकि 27 जुलाई को जारी किए गए आंकड़ों में यह बताया गया है कि 24 जुलाई तक मक्के का रकबा बढ़कर 77.80 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। इससे पहले 10 जुलाई तक मक्के का बोआई क्षेत्र महज 55.97 लाख हेक्टेयर ही था।
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अल नीनो के प्रभाव से हुई वर्षा की कमी और देरी के कारण कई राज्यों में बोआई प्रभावित हुई है, हालांकि किसान अब भी मक्के को पसंदीदा फसल मान रहे हैं। खरीफ सीजन में मक्के की खेती को लेकर देशभर से मिले-जुले संकेत सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में मक्के की बोआई में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं बिहार तथा आंध्र प्रदेश में भी रकबा कुछ बढ़ा है। लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बोआई कम होने से इसके कुल क्षेत्रफल में 8 लाख हेक्टेयर से अधिक की भारी गिरावट आ गई है। इससे आने वाले महीनों में उत्पादन और पशु चारा उद्योग की जरूरतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कई राज्यों में बोआई प्रभावित होने से इस वर्ष मक्का उत्पादन कम रहने की आशंका है। मक्के के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे रहने के कारण कुछ किसानों ने सोयाबीन की खेती की ओर रुख किया है। बोआई में देरी और रकबे में कमी के कारण पिछले वर्ष जितना उत्पादन हासिल करना मुश्किल दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम फसल अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन में 305.09 लाख टन और पूरे साल में 550.95 लाख टन मक्का उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया है, जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान 434.09 लाख टन (खरीफ सीजन में 248.8 लाख टन) की पैदावार हुई थी।
देश में मक्का का थोक मंडी भाव 2200-2300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2400 रुपये है। रकबे में कमी के बावजूद घरेलू बाजार में मक्के के भाव में कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। हालांकि, वैश्विक बाजार में कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। वैश्विक बाजार में जुलाई में मक्का के दाम करीब 9 फीसदी और पिछले एक साल में करीब 13 फीसदी चढ़ चुके हैं। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की कीमत 4.61 डॉलर प्रति बूसेल चल रही है। एथेनॉल में मक्के की बढ़ती मांग की वजह से भी इसकी कीमतें बढ़ रही हैं।