ईद का मौका है, लेकिन इस बार उत्साह कम दिख रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई अटक गई है। तमिलनाडु के होटल वाले अब मजबूरन आग की लकड़ी का सहारा ले रहे हैं। इससे खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ने लगे हैं। सबसे ज्यादा असर बिरयानी पर पड़ा है, जो रमजान और ईद के समय सबसे ज्यादा मांग वाली डिश है। लोग कह रहे हैं कि परिवार के साथ जश्न मनाने का मजा ही फीका पड़ गया।
होटल वाले पहले LPG पर ही सब कुछ बना रहे थे। अब लकड़ी पर शिफ्ट हो गए हैं। तमिलनाडु होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष एम वेंकदासुब्बू ने बताया कि इस बार होटलों ने बिरयानी के साथ-साथ उसके साथ आने वाले साइड डिश भी लकड़ी पर ही तैयार करने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा, “जो भी साइड डिश लोग ऑर्डर करें, वो मिल जाएगा। लेकिन लकड़ी के दाम बढ़ने से सब कुछ महंगा हो गया है। हमने डीप फ्राई वाले आइटम बेचना बंद कर दिया है क्योंकि वो ज्यादा तेल और समय लेते हैं।”
चेन्नई में तो हालात और भी बुरे हैं। उद्योग के लोगों का कहना है कि करीब 90 फीसदी होटल मुनाफे में नहीं चल रहे। सिर्फ चेन्नई में बिजनेस में 30 फीसदी की गिरावट आई है। बाकी तमिलनाडु में भी 10 फीसदी असर पड़ा है। वेंकदासुब्बू ने आंकड़े देते हुए कहा, “पब्लिक एग्जाम भी इस महीने चल रहे हैं, इसलिए होटलों में लोग कम आ रहे हैं। मैं नहीं सोचता कि आने वाले दिनों में हालात सुधरेंगे। लकड़ी महंगी हो गई है और LPG सिलेंडर नहीं मिल रहे, इसलिए आगे खाने-पाने की चीजों के दाम और बढ़ेंगे।”
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बिरयानी को लेकर होटल वालों का कहना है कि लकड़ी पर बनाना पुराना और पारंपरिक तरीका है। इससे स्वाद में चार चांद लग जाते हैं। पहले LPG आने के बाद ज्यादातर होटल गैस पर ही बनाते थे। लकड़ी सिर्फ शादियों या बड़े कार्यक्रमों में इस्तेमाल होती थी। अब इस संकट में होटलों ने फिर से लकड़ी अपनाई है। एक होटल वाले ने बताया, “दूसरा फायदा ये है कि लकड़ी पर बनी बिरयानी का टेस्ट गैस वाली से ज्यादा अच्छा लगता है। लेकिन लकड़ी के दाम कई गुना बढ़ गए हैं, इसलिए बिरयानी की कीमत भी ऊपर चली गई।”
कई होटल मालिकों ने समय और खर्च बचाने के लिए सेंट्रलाइज्ड किचन का रास्ता चुना है। एक जगह पर बड़े पैमाने पर बिरयानी बनाई जा रही है और फिर दूसरे ब्रांच में भेज दी जाती है। इससे लकड़ी भी कम लग रही है और काम भी जल्दी हो जाता है। ईद का दिन शनिवार को पड़ने के कारण होटलों में बिरयानी की डिमांड पहले से ज्यादा थी, लेकिन कीमत बढ़ने से लोग थोड़ा सोच-समझकर खरीद रहे हैं।
पेरुंगुडी के रहने वाले हिदायतुल्लाह खान लंबे समय से यहां रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले रमजान में पूरा परिवार, यानी 7-10 लोग एक जगह इकट्ठा होते थे। सब मिलकर खाना शेयर करते थे। इस बार ऐसा नहीं हो रहा। “अब दो-तीन लोग ही अपने घर पर कम मात्रा में बिरयानी बना रहे हैं। LPG की कमी और दाम बढ़ने की वजह से रिश्तेदारों के यहां जाना भी कम हो गया।” खान ने कहा कि परिवार छोटे-छोटे ग्रुप में रहकर ही जश्न मना रहे हैं।
एक बड़े रेस्टोरेंट चेन के टॉप अधिकारी ने बताया कि उन्होंने इंडक्शन स्टोव पर शिफ्ट कर लिया है। “हमारे लगभग सारे ब्रांच में अब इंडक्शन स्टोव चल रहे हैं। हम लकड़ी और दूसरे तरीकों की तरफ भी जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि पहले दोसा पूरे दिन उपलब्ध रहता था। अब दोपहर 12 से 3 बजे तक दोसा नहीं मिलता। चपाती और परोठा माइक्रोवेव में गर्म करके सर्व किए जा रहे हैं। इससे कुछ समय बच रहा है और बिजनेस भी चल रहा है।
होटल वाले मान रहे हैं कि ये संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है। लकड़ी के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं और LPG की सप्लाई अभी भी अटकी हुई है। नतीजा ये कि आने वाले दिनों में साधारण खाने की चीजों के भी दाम बढ़ने के आसार हैं। रमजान का ये मौसम होटल इंडस्ट्री के लिए चुनौती भरा साबित हो रहा है। लोग अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्दी सप्लाई ठीक हो जाए।
(PTI के इनपुट के साथ)