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Rupee vs Dollar: रुपया पहली बार 95 के पार लुढ़का, रिकॉर्ड निचले स्तर पर आया

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मौजूदा वित्त वर्ष में रुपया 2011-12 के बाद अपनी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करने की ओर बढ़ रहा है

Last Updated- March 30, 2026 | 4:17 PM IST
Rupee vs Dollar

Indian Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया सोमवार को लगातार तीसरे सत्र में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच एशियाई मुद्राओं के कमजोर रुख के कारण, केंद्रीय बैंक द्वारा बैंकों की फॉरेक्स पोजीशन सीमा कड़ी करने से मिली राहत भी बहुत कम समय के लिए ही रही।

रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार करते हुए 95.21 प्रति डॉलर तक कमजोर हो गया, जो पिछले बंद स्तर से 0.3 फीसदी की गिरावट है।

Indian Rupee: रिकॉर्ड गिरावट से बढ़ी चिंता

मौजूदा वित्त वर्ष में रुपया 2011-12 के बाद अपनी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करने की ओर बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने भारत के लिए महंगाई और आर्थिक वृद्धि के जोखिम बढ़ा दिए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक अस्थिरता और लगातार पूंजी निकासी के दबाव और बढ़ गए हैं।

तेल की ऊंची कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भारतीय शेयर बाजार को मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट की ओर धकेल दिया है, जबकि बॉन्ड बाजार 2023 के बाद अपने सबसे खराब वित्त वर्ष की ओर बढ़ रहा है।

Also Read: Closing Bell: बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1636 अंक गिरकर 71,948 पर बंद, निफ्टी 22335 के नीचे

रुपये में कमजोरी का रुझान बरकरार

हालांकि रुपया शुरुआत में तेज मजबूती के साथ खुला था, लेकिन बाद में इसमें आई बढ़त खत्म हो गई, क्योंकि कॉरपोरेट्स ने ऑनशोर स्पॉट मार्केट और नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) के बीच आर्बिट्राज ट्रेड शुरू कर दिए। ऐसे सौदों की गुंजाइश केंद्रीय बैंक द्वारा शुक्रवार को बैंकों की फॉरेक्स पोजीशन सीमा कड़ी किए जाने के बाद बनी।

विश्लेषकों का कहना है कि फॉरेक्स पोजीशन लिमिट सख्त करने का कदम शॉर्ट टर्म में रुपये को स्थिर करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद रुपये में कमजोरी (डिप्रिसिएशन) का रुझान बना रह सकता है।

RBI के कदम से सीमित राहत

बार्कलेज के विश्लेषकों ने सोमवार के नोट में कहा, “मुख्य बात यह है कि आरबीआई की यह सीमा (कैप) उन बुनियादी कारणों को नहीं बदलती, जिनकी वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है।”

उन्होंने कहा, “तेल सप्लाई में किसी भी झटके के प्रति रुपया खास तौर पर संवेदनशील बना हुआ है। साथ ही भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) और कमजोर हो सकता है, जबकि पूंजी और वित्तीय खाते पर दबाव भी बढ़ रहा है।”

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First Published - March 30, 2026 | 4:13 PM IST

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