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वायदा बाजार में काली मिर्च में सुधार

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Last Updated- December 07, 2022 | 4:45 AM IST

सटोरियों की गतिविधियों के बढ़ने से मंगलवार को वायदा बाजार में कारोबार की शुरुआत में काली मिर्च की कीमत में लगभग 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।


सबसे अधिक सक्रिय जून-सुपुर्दगी वाले करारों में 1.2 प्रतिशत या 162 रुपये की वृध्दि हुई और यह 14,299 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। जुलाई-सुपुर्दगी वाले करारों में भी 1.3 प्रतिशत या 174 रुपये की वृध्दि देखी गई। इनका कारोबार 14,604 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से हो रहा था।

एनसीडीईएक्स में आज 2,028 टन काली मिर्च का कारोबार किया गया। कार्वी कॉमट्रेड के जी. हरीश ने कहा कि निर्यात में हुई वृध्दि और डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी काली मिर्च में आई तेजी के मुख्य वजह हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान मूल्यों पर शॉर्ट-कवरिंग से भी जिंस की कीमतों में तेजी आई है।

जबकि कारोबारियों ने कहा कि मॉनसून के कारण दक्षिणी क्षेत्रों से इलायची की आवक कम होने और स्टॉकिस्टों द्वारा स्टॉक बनाए रखने से इसकी कीमतों में तेजी आई है। हालांकि, हाजिर बाजार में इलायची का भाव अपेक्षाकृत कम रहा और यह 4,394.20 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

जीरे में तेजी

जीरे के मौजूदा भावों पर सटोरियों के शार्ट-कवरिंग से आज एनसीडीईएक्स में जीरे का वायदा भाव करीब 0.9 फीसदी बढ़ गया। जुलाई सुपुर्दगी के लिए जीरे का वायदा भाव 91 रुपये चढ़कर 11,044 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। आज दोपहर 11:45 बजे एक्सचेंज में जुलाई सुपुर्दगी के लिए 1,236 टन जीरे का कारोबार दर्ज किया गया।

वहीं सितंबर सुपुर्दगी के लिए जीरे का भाव 0.08 प्रतिशत या 98 रुपये चढ़कर 11,490 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया और 1,584 टन जीरे का कारोबार दर्ज किया गया। कार्वी कॉमट्रेड के जी. हरीश का कहना है कि सटोरियों द्वारा निचले स्तर पर शार्ट-कवरिंग किए जाने से जीरे के भाव में सुधार होने में मदद मिली है।

हल्दी में मंदी

दक्षिण के राज्यों में हल्दी की बुवाई और अच्छे उत्पादन के पूर्वानुमानों से कारोबारियों ने लाभ वसूलना शुरु कर दिया जिससे वायदा बाजार में हल्दी का कारोबार निगेटिव-जोन में किया जा रहा था। दोपहर के एक बजे एनसीडीईएक्स में अगस्त के करार की कीमतों में 0.24 प्रतिशत या 10 रुपये की कमी देखी गई और इसका कारोबार 4,100 रुपये प्रति क्विंटल पर किया जा रहा था।

हालांकि जून के करार की कीमतें 3 रुपये अधिक थीं और इनका कारोबार 3,900 रुपये प्रति क्विंटल पर किया जा रहा था क्योंकि ये करार लगभग 10 दिनों में समाप्त होने वाले हैं और कारोबारियों ने अपनी पोजीशन बनाए रखी है। एक विश्लेषक ने बताया कि कारोबारियों द्वारा मुनाफावसूली के कारण हल्दी की कीमतों में कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस खबर से कि तमिलनाडु में बुवाई समाप्त हो चुकी है और बुवाई के क्षेत्र में वृध्दि हुई है, से कारोबारी धारणाएं प्रभावित हुई हैं।

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First Published - June 10, 2008 | 11:40 PM IST

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