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देर हुई तो पौध पोषण विधेयक का हो सकता है कृषि विधेयक जैसा हाल

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Last Updated- December 11, 2022 | 9:01 PM IST

उर्वरक उद्योग का मानना है कि कुछ हफ्ते पहले आए एकीकृत पौध पोषण प्रबंधन विधेयक, 2022 के मसौदे का भी हाल वापस लिए गए कृषि कानूनों जैसा हो सकता है। उनका मानना है कि सरकार को इस कानून को लाने में जल्दबाजी करने की बजाय पहले किसानों और राज्य सरकारों सहित सभी साझेदारों से उपयुक्त चर्चा कर लेनी चाहिए।   
सार्वजनिक परामर्श के लिए रखे गए मसौदे में देश में उर्वरक के संतुलित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए इसकी कीमत, आवाजाही, वितरण, आयात और भंडारण के नियमन की बात कही गई है। इस मसौदे में उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) और उर्वरक आवाजाही आदेश (एफएमओ) के विभिन्न मौजूदा प्रावधानों को एक कानून के अंदर रखे जाने की बात कही गई है जिसको लेकर उर्वरक उद्योग के भीतर कई प्रश्न खड़े हो गए हैं।
फिलहाल आदेश को विभिन्न मंत्रालय लागू कर रहे हैं।
एक ओर जहां एफसीओ को कृषि विभाग द्वारा लागू किया जाता है वहीं एफएमओ उर्वरक विभाग के दायरे में आता है। एफएमओ के जरिये राज्यों के आकलन किए गए जरूरत के मुताबिक उन्हें संयंत्रों और बंदरगाहों से विभिन्न रासायनिक उर्वरकों की आवाजाही, वितरण और आवंटन का नियमन किया जाता है।
उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एफसीओ और एफएमओ को रद्द करने का प्रस्ताव देते हुए भी इनके कुछ हिस्सों को नए कानून में रखने से बहुत बड़ी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी और इससे नवाचार को धक्का लगेगा तथा इस क्षेत्र में दोबारा से लाइसेंस तथा इंस्पेक्टर राज की वापसी हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि एफसीओ और एफएमओ दोनों ही प्रशासनिक आदेश हैं और एक अलग कानून में इनके कुछ प्रावधानों को शामिल करने तथा उनमें दंडात्मक प्रावधानों को रखने से उद्योग में अकारण ही विनियमन की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। सूत्रों ने कहा कि उर्वरक उद्योग मसौदा विधेयक पर अपनी आपत्तियों को सत्ता के सबसे उच्च स्तर पर उठाएगा।
अधिकारी ने कहा कि मसौदे में पौध के पोषकों के प्रबंधन के मकसद से उर्वरक उद्योग के विनियमन की बात कही गई है। लेकिन क्या इस विधेयक को मानव पोषण, पशु पोषण या बीज के लिए ही मौजूदा कानूनी वातावरण से अधिक कठोर बनाने का कोई कारण है। उर्वरक उद्योग को लगता है कि उर्वरक सब्सिडी देने के लिए नीतियों और मानदंडों का पौध पोषण, प्रबंधन और मिट्टी के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है।
पोषकों और उत्पादों पर असंतुलित सब्सिडियों की मौजूदा नीति एनपीके अनुपात में असंतुलन की मुख्य वजह है जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। अधिकारी ने कहा, ‘पोषण के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नए कानून लाने की बजाय उद्योग की जरूरत के हिसाब से उर्वरक सब्सिडियों के रास्ते के निर्धारण पर पुनर्विचार करना चाहिए।’

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First Published - February 25, 2022 | 11:21 PM IST

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