कमोडिटी

शुल्क बढ़ने से यूएई से बढ़ सकता है सोना-चांदी का आयात

भारत द्वारा सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद यूएई से होने वाले आयात को बड़ा फायदा मिल सकता है

Published by
असित रंजन मिश्र   
Last Updated- May 14, 2026 | 11:19 AM IST

सीमा शुल्क बढ़ाए जाने के सरकार के ऐलान के बाद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सोना और चांदी के आयात में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते में ये कीमती धातु भी शामिल हैं। यूएई के साथ मई 2022 में लागू हुए भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत भारत ने चांदी पर आयात शुल्क 10 वर्षों में धीरे-धीरे 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने पर सहमति जताई थी। यूएई से चांदी के आयात पर रियायती शुल्क फिलहाल 7 प्रतिशत है।

भारत द्वारा सामान्य आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के बाद शुल्क में 8 प्रतिशत तक का अंतर हो गया है। इससे दुबई के रास्ते आयात के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। वर्ष 2031 तक सीईपीए के तहत शुल्क शून्य होने तक यह अंतर हर साल और बढ़ने की उम्मीद है।

यूएई से सोने के आयात को तरजीही पहुंच भी हासिल है। भारत ने टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के तहत सामान्य मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) दर से एक प्रतिशत कम शुल्क पर दुबई से सोने के आयात की अनुमति दी थी। यह कोटा 2022 में 120 टन सालाना से शुरू हुआ और 2027 तक बढ़कर 200 टन होने वाला है, जो भारत के सालाना कुल सोने के आयात का लगभग एक चौथाई है।

नई एमएफएन शुल्क संरचना के साथ, आयातित सोने पर प्रभावी शुल्क 15 प्रतिशत होगा, जबकि यूएई कोटे के तहत आयातित सोने पर 14 प्रतिशत शुल्क लगेगा। भारत में सोने की खपत बहुत ज्यादा है और यह अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

दिल्ली स्थित विचार संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने सरकार से अपने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की नीतियों, विशेष रूप से भारत-यूएई व्यापार समझौते के तहत दुबई को दी गई कीमती धातुओं पर शुल्क रियायतों की समीक्षा करने का आग्रह किया है। जीटीआरआई का कहना है कि इन रियायतों की वजह से हाल में सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘बढ़ता शुल्क अंतर दुबई के रास्ते वैश्विक सोने के आयात को बढ़ावा दे सकता है, यह अलग बात है कि यूएई सोने या चांदी का खनन नहीं करता है।’ भारत का सोने का आयात वित्त वर्ष 2023 में 35 अरब डॉलर से बढ़ कर वित्त वर्ष 2026 में 72 अरब डॉलर हो गया। यूएई से भारत का सोने की छड़ों का आयात वित्त वर्ष 2023 में 3.1 अरब डॉलर से बढ़ कर वित्त वर्ष 2026 में 15.3 अरब डॉलर हो गया। भारत के सोने के आयात में यूएई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 में 7.8 प्रतिशत से बढ़ कर वित्त वर्ष 2025 में 16.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई।

जीटीआरआई ने स्रोत नियमों के प्रावधानों के संभावित बेजा इस्तेमाल और केवल शुल्क लाभ हासिल करने के उद्देश्य से की जाने वाली कृत्रिम प्रक्रियाओं के बारे में भी चेताया है। इसमें व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा के लिए सख्त उत्पत्ति नियमों, मुक्त व्यापार समझौतों के तहत कीमती धातुओं पर दी जाने वाली रियायतों की समीक्षा और भविष्य के व्यापार समझौतों से सोने, चांदी, प्लेटिनम और हीरे को बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

बीते साल अक्टूबर में भारत ने फैसला किया था कि भारत-यूएई सीईपीए के तहत सोने के लिए टीआरक्यू का आवंटन प्रतिस्पर्द्धी बोली (निविदा प्रक्रिया) के आधार पर किया जाएगा, ताकि सोने के आयात पर अधिक निगरानी रखी जा सके। पिछले साल नवंबर में दोनों पक्षों ने सीईपीए के तहत हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और बाजार पहुंच के मुद्दों, डेटा साझाकरण, सोने के टीआरक्यू के आवंटन, एंटी-डंपिंग मामलों, सेवाओं, मूल नियमों, बीआईएस लाइसेंसिंग आदि पर विस्तृत चर्चा की। वाणिज्य विभाग के एक बयान में कहा गया है, ‘भारत ने यूएई को पारदर्शी प्रतिस्पर्द्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से सोने के टीआरक्यू के आवंटन के अपने हाल के निर्णय पर भी जानकारी दे दी है।’

First Published : May 14, 2026 | 11:19 AM IST