Gold Import Duty Cut: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें गिरी तो घरेलू बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ी। सोने की कीमतों में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार तो है लेकिन भारतीय बाजार में आयात शुल्क में कटौती की अटकलों ने सोने की कीमतें में दबाव बनाया है। अटकलों के दबाव के चलते ही घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में डिस्काउंट बढ़कर 135 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया जो तीन महीने में सबसे ज्यादा है।
बुलियन बाजार में चल रही अटकलों के मुताबिक सरकार सोने पर आयात शुल्क 15% से घटकर 6% करने पर विचार कर रही है। यानी इम्पोर्ट ड्यूटी में 9 फीसदी की कमी आ जाएगी जिससे स्थानीय बाजार में कीमतें तुरंत गिरेंगी। आयात शुल्क में कटौती की खबरों के चलते ही सर्राफा बाजारों में भारी डिस्काउंट देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि जुलाई 2024 में बजट के समय में सरकार ने सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था। इसके बाद 13 मई 2026 को विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ते दबाव और बढ़ते इंपोर्ट बिल को काबू में करने के लिए इसे वापस से बढ़ाकर 15% कर दिया गया ।
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के लगातार महंगाई के दबाव पर दिए गए बयानों के बाद ट्रेडर्स ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें बढ़ा दीं, जिससे सोने की कीमत में गिरावट शुरू हुई। वॉर्श ने जोर दिया कि महंगाई में कोई खास कमी नहीं आई है और 2% का लक्ष्य अभी भी पक्का है, जबकि मौजूदा वित्तीय हालात बहुत सख्त नहीं हैं।
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उन्होंने यह भी दोहराया कि महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरें ही फेड का मुख्य हथियार हैं, जिससे मनी मार्केट में सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 50% से अधिक हो गई है, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। फिजिकल डिमांड भी कमजोर हुई है, खासकर भारत में जहां सोने पर डिस्काउंट पिछले हफ्ते के 65 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर आधिकारिक घरेलू कीमतों के मुकाबले 135 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है, जो तीन महीनों में सबसे ज्यादा डिस्काउंट है।
बुलियन कारोबारियों की माने तो केंद्र सरकार सोने-चांदी पर बढ़ाए गए इम्पोर्ट ड्यूटी या आयात शुल्क को वापस लेने पर गंभीरता से सोच रही है ताकि तस्करी रोकने के साथ ही कारोबार में भी आसानी हो। सर्राफा व्यापारियों और ज्वैलर्स एसोसिएशन की तरफ से सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि सोने के आयात पर टैक्स को कम कर के दोबारा 6% किया जाए ताकि व्यापार औपचारिक बना रहे।
इस बीच सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ विभाग इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या कम टैक्स से तस्करी रुकेगी और औपचारिक इंपोर्ट बढ़ेगा। फिलहाल, इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.
इंडिया बुलियन एवं ज्वैलरी एसोसिएशन के कुमार जैन कहते हैं कि सोने और चांदी के इम्पोर्ट पर ज्यादा टैक्स लगने की वजह से सोने की अवैध तस्करी और समानांतर अर्थव्यवस्था (ग्रे मार्केट) को बढ़ावा मिला है। इससे आधिकारिक और अनौपचारिक आयात के बीच कीमतों का अंतर बढ़ गया है।
सरकार ने डॉलर रिजर्व बचाने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी, लेकिन जब तस्करी के चलते अनौपचारिक रूप से डॉलर की मांग बढ़ती है, तो ओपन मार्केट में डॉलर और महंगा हो जाता है। सरकार से आयात शुल्क में कटौती करती है तो तस्करी खत्म होगी, कारोबार में साफ सुथरा होगा और सरकारी खजाने में टैक्स ज्यादा जमा होगा।
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि ज़्यादा टैक्स ने तस्करी को बढ़ावा दिया है। भारत आम तौर पर हर साल 700-800 टन सोना खरीदता है और UAE, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाज़ारों में तैयार गहनों का निर्यात करता है।
सोने और चांदी की कीमत में आज (31 अगस्त) भारी गिरावट आई है। एमसीएक्स पर शुरुआती कारोबार में सोना करीब 2,600 रुपये से ज्यादा गिर गया जबकि चांदी की कीमत में 2,600 रुपये से ज्यादा गिरावट आई है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमत में दो फीसदी से ज्यादा तेजी आई है। इसका असर सोने और चांदी की कीमत पर देखने को मिल रहा है। 4 दिनों में सोने की कीमत में 9,500 रुपये की गिरावट आई है जबकि चांदी की कीमत में तीन सेशन में 7,700 रुपये सस्ती हो चुकी है।