facebookmetapixel
Advertisement
विरोध के बावजूद नहीं रुकेगी ग्रेट निकोबार पोर्ट परियोजना, तय समय पर होगी पूरी: पोत परिवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवालऑनलाइन बिकने वाले खाने-पीने के सामान पर एक्सपायरी डेट गायब, उपभोक्ता मामलों के विभाग में करें शिकायतअल नीनो और एथनॉल की बढ़ती मांग से चीनी उद्योग पर संकट, उत्पादन और निर्यात दोनों पर दबावEditorial: तेल की कीमतें घटीं, अब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने पर जोररुपये की कमजोरी की जड़ें कहीं गहरी, सिर्फ तेल और पश्चिम एशिया संकट नहीं जिम्मेदारसफर के अनुभव: अमेरिका यात्रा और भारत को लेकर निकले निष्कर्षतेल कीमतों का सबसे बुरा दौर बीत चुका, भाव 80-90 डॉलर के दायरे में रहने की उम्मीद: जिम बर्कहार्डGold-Silver Price: डॉलर की तेजी और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने-चांदी में आई गिरावटसेबी का बड़ा प्रस्ताव: वित्तीय कंपनियों को मिलेगी सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट की अनुमति, विज्ञापन नियम होंगे आसानAI कंपनियों के लिए जोखिम ढांचा और नया कानून लाएगी सरकार, संसद में इस साल पेश हो सकता है विधेयक

जीरा वायदा पर सर्किट का ‘छौंक’

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 5:41 AM IST

निर्यात की भारी मांग और जीरे की कम आपूर्ति की वजह से घरेलू वायदा बाजार की शुरुआती कारोबार में जीरे का मूल्य दो प्रतिशत के ऊपरी सर्किट को छू गया।


कार्वी कॉमट्रेड शोध प्रमुख हरीश जी ने कहा, ‘मांग और आपूर्ति की असमानता के कारण जीरे के भाव में तेजी देखी जा रही है। फिलहाल जीरे के सीजन की समाप्ति की वजह से आपूर्ति कम हो रही है जबकि निर्यात की मांग में दिन प्रतिदिन वृध्दि हो रही है।’

एनसीडीईएक्स पर सुबह के 10.30 बजे जुलाई के सौदे का भाव दो प्रतिशत के ऊपरी स्तर को छू गया, इसका कारोबार 11,237 रुपये प्रति क्विंटल पर किया जा रहा था। अन्य दो करारों में भी तेजी देखी गई। सितंबर और अक्टूबर के सौदे के मूल्यों में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई और इनके कारोबार क्रमष: 11,733 रुपये और 11,920 रुपये पर किए जा रहे थे।

जीरा कारोबारियों के अनुसार इस वर्ष निर्यात के बेहतर आसार हैं क्योंकि ऐसा अनुमान है कि विश्व के शेष हिस्सों में जीरे का उत्पादन 30 प्रतिशत कम होगा। तुर्की, सीरिया और इरान में कम बारिश के कारण जीरे के उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने का कि कीमतें सस्ती होने के कारण निर्यातक भारत से जीरे की खरीदारी भारी मात्रा में कर रहे हैं। जीरे का भारतीय मूल्य 2,600 डॉलर प्रति टन है जबकि सीरिया और तुर्की के मूल्य 3,600 से 3,800 डॉलर प्रति टन बताए जा रहे हैं।

हरीश ने कहा कि शॉर्ट कवरिंग के कारण भी मूल्य में वृध्दि हुई है। उन्होंने कहा, ‘हालिया बिकवाली से निवेशकों ने अपने वर्तमान शॉर्ट पोजीशन को कवर करना शुरु कर दिया जिससे मूल्यों में बढ़ोतरी हुई है।’ गुजरात के ऊंझा बाजार में जीरे का हाजिर मूल्य 10,518.75 रुपये प्रति क्विंटल था। दिलचस्प बात यह है कि सितंबर के सौदे में अन्य दो सौदों की तुलना में बेहतर ओपन इंट्रेस्ट (8,427) देखे गए।

सोने में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में मजबूती के बावजूद शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतों में मामूली गिरावट का रुख रहा। एमसीएक्स में अगस्त डिलीवरी के लिए वायदा भाव घटकर 12,096 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं अक्तूबर डिलीवरी के लिए भाव 12,149 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल के दिनों में सोने और कच्चे तेल के बीच के संबंध कमजोर पड़ गए हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद सोने में अधिक तेजी नहीं आई है। उधर, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज में जुलाई डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमत 0.09 फीसदी बढ़कर 136.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एसएमसी ब्रोकरेज की विश्लेषक वंदना भारती ने कहा कि इन दिनों कच्चे तेल की कीमतों का सोने के भाव पर मामूली असर पड़ता दिख रहा है।

Advertisement
First Published - June 13, 2008 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement