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जीएम सरसों की मंजूरी रद्द की जाए’

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:47 PM IST

जीईएसी द्वारा जीएम सरसों को  परीक्षण संबंधी मंजूरी देने के कुछ दिनों के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख सहयोगी भारतीय किसान संघ और स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री भूपेंद्र यादव से तत्काल इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। बीकेएस ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि जिस तरह जीईएसी ने मंजूरी दी है वह अनैतिक, अतार्किक है और इसकी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराई जानी चाहिए।

 इसके ठीक विपरीत, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने आज कई ट्वीट कर मंजूरी का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि डीएमएच-11 (जिस किस्म को मंजूरी दी गई थी) में सरसों की पैदावार में उल्लेखनीय सुधार की क्षमता है, जो अभी प्रति हेक्टेयर एक टन उत्पादन पर स्थिर है।  इस मंजूरी से सरसों की खेती और खाद्य तेल के उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम ज्यादा पैदावार और सरसों की बेहतर संकर किस्म मिलने के रास्ते खुले हैं।

 कार्यालय ने कहा, ‘इस से खाद्य तेल का आयात घटेगा और संकर किस्म की बार्नसे और बार्सटर प्रणाली का उपयोग करते हुए संकर सरसों की किस्म विकसित की जा सकेगी। इससे देश में जीएम सरसों की संकर किस्म के विकास के साथ नए युग की शुरुआत होगी।’

 इस बीच, बीकेएस, जो देश के लगभग सभी जिलों में इकाइयां रखने वाले किसानों का सबसे बड़ा संगठित समूह होने का दावा करता है, एक बयान में कहा कि जीएम सरसों को मधुमक्खियों और परागण के लिए हानिकारक माना जाता है। अगर यह सच है तो देश में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने की प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता का क्या होगा।

इसमें कहा गया है कि जब जीएम सरसों के मौजूदा संस्करण से पैदावार में कोई खास सुधार नहीं होता है तो किसके दबाव में जीईएसी ने यह मंजूरी दी है।स्वदेशी जागरण मंच ने भूपेंद्र यादव को लिखे पत्र में कहा कि प्रोफेसर पेंटल द्वारा किया गया जीएम सरसों का दावा स्वदेशी है और भारत में विकसित किया गया है, ‘पूरी तरह से असत्य’ है।

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First Published - October 28, 2022 | 10:39 PM IST

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