नयी दिल्ली, आठ जुलाई :भाषा: चार साल पहले शायद ही कोई उसे जानता हो लेकिन बीजिंग ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने के बाद सुपरस्टार बनी साइना नेहवाल पिछले चार साल में भारतीय बैडमिंटन का चेहरा और ओलंपिक पदक की बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है । उसे इसका इल्म है और वह अपने इस ख्वाब को ताबीर में बदलने को बेकरार भी है ।
हैदराबाद की गचीबाउली गोपी अकादमी में मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में दिन में छह से सात घंटे की कड़ी ट्रेनिंग कर रही साइना ने 27 जुलाई से शुरू हो रहे ओलंपिक के बारे में भाषा से कहा, मैं दिन में छह से सात घंटे से अधिक समय ट्रेनिंग कर रही हूं। मैं अपने मौजूदा फिटनेस स्तर से खुश हूं और अपने स्टेमिना और गति के अलावा कोर्ट में कौशल पर भी काम कर रही हूं।
उन्होंने कहा, अगर सब कुछ सही रहा तो मुझे यकीन है कि लंदन खेलों के दौरान ओलंपिक में पदक जीतने का मेरा सपना साकार हो जाएगा। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगी।
मात्र 18 बरस की उम्र में बीजिंग ओलंपिक के दौरान अपनी प्रतिभा को लोहा मनवाने वाली साइना ने कहा कि अब वह अधिक अनुभवी हैं और इस बार उनका दावा मजबूत है। साइना के पास बीजिंग ओलंपिक के दौरान भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक के करीब पहुंचने का मौका था लेकिन वह क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया की मारिया क्रिस्टीन युलियांती के खिलाफ तीसरे और निर्णायक गेम में 11 . 3 की मजबूत बढ़त बनाने के बावजूद हार गई थी।
जारी भाषा