इंडियन फार्मास्युटिकल्स एलायंस :आईपीए: तथा आर्गनाइेजशन आफ द फार्मास्युटिकल प्रोडयूसर्स आफ इंडिया :ओपीपीआई: के अनुसार नई औषधि नीति से भारतीय दवा कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
आईपीए के महासचिव डी शाह ने प्रेट्र से कहा, शुरूआती रिपोर्ट के अनुसार कई प्रमुख ब्रांड की दवाएं 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक सस्ती हो जाएगी पर इससे 67,500 करोड़ रुपये के घरेलू दवा बाजार में कंपनियों का मुनाफा 4,000 करोड़ रुपये रह जाएगा जो मौजूदा स्तर के आधे के बराबर है।
शाह का मानना है कि लाभ की संभावनाएं प्रभावित होने से निवेशकों का उत्साह प्रभावित हो सकता है। साथ ही कंपनियां नया निवेश करने या जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची :एनएलईएम: में शामिल औषधियांे की उत्पादन क्षमता बढ़ाने से कतरा सकती है।
इसी प्रकार का विचार प्रकट करते हुए ओपीपीआई के महानिदेशक तपन जे राय ने कहा कि इसका उद्योग पर तत्काल तथा उल्लेखनीय नकारात्मक असर होगा।
हालांकि राय ने कहा कि बाजार आधारित नीति दीर्घकाल में देश के लिये फायदेमंद साबित होगी।
उन्होंने कहा, यह नीति दवाओं को सस्ता करने तथा उसकी उपलब्धता बढ़ाने में मददगार होगी। इस नीति के साथ सार्वजनिक अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों के जरिये जरूरी दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने से समाज के सभी तबकों को फायदा होगा....।
मंत्रिमंडल ने 22 नवंबर को औषधि नीति को मंजूरी दे दी। इससे 348 जरूरी दवाओं को कीमत नियंत्रण दायरे में लाया जाएगा।
फिलहाल सरकार राष्ट्रीय औषधि नीति प्राधिकरण :एनपीपीए: के जरिये 74 थोक दवाओं की कीमत का नियंत्रण करती है।