उमर ने कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथी करबला की लड़ाई में अदम्य साहस और सब्र का परिचय देते हुए शहीद हो गये थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि करबला हमें सभी परिस्थितियों में बुरी शक्तियों को खारिज करने और सत्य के सिद्धांतों पर बने रहने का पाठ पढाता है।
सन 680 ईसवी में हजरत हुसैन के नेतृत्व वाली छोटी सेना और यजीद की सेना के बीच करबला की लड़ाई हुई थी। इस लड़ाई मंे हजरत हुसैन और उनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
शिया समुदाय मुहर्रम के दौरान शहीदों की मौत पर शोक मनाता है।