दरअसल, अभियोजन पक्ष हत्या के उसके इरादे को साबित करने में नाकाम रहा, जिसके आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टीआर नवल ने उदयवीर सिंह को बीएसईएस कर्मचारी राम सुमेर की गोली मार कर हत्या करने के आरोप से बरी करते हुए कहा कि पुलिस यह साबित करने में नाकाम रही कि आरोपी ने अपने अपराध को मृतक की पत्नी के समक्ष कबूल किया था।
न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या को अंजाम देने के आरोपी के इरादे को साबित करने मंे नाकाम रहा है। दोनों पक्षांे के बीच कोई बैरभाव या दुश्मनी नहीं थी और ऐसी कोई वजह नजर नहीं आती कि आरोपी सुमेर की हत्या करता।
अदालत ने जेल अधीक्षक को सिंह को रिहा करने का निर्देश दिया जो न्यायिक हिरासत मंे है।
पुलिस ने अदालत में दलील दी कि मृतक के पड़ोसी सिंह ने सुमेर की पत्नी से मेलजोल बढ़ाया। वह सुमेर की गैरहाजिरी में उसके घर आना जाना किया करता था और उसकी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा था।
अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने सुमेर की हत्या की ताकि वह उसकी पत्नी से शादी कर सके और उसकी संपत्ति हड़प सके।
भाषा