यूरिया पर पूरी तरह सरकार का नियंत्रण है। उत्पादन की लागत और अधिकतम खुदरा मूल्य के अंतर को सब्सिडी के तौर पर निर्माताओं को प्रदान किया जाता है। हालांकि नाफ्था पर संचालित यूरिया इकाइयों को दी जाने वाली सब्सिडी उत्पादन की अधिक लागत के कारण ज्यादा हो जाती है।
उर्वरक राज्यमंत्री श्रीकांत कुमार जेना ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, वित्त मंत्रालय ने मौजूदा नाफ्था आधारित यूरिया इकाइयों को गैस आधारित इकाइयों में तेजी से बदलने की वकालत की है। इसके मुताबिक उर्वरक विभाग नयी मूल्य योजना नीति पर काम कर रहा है।
विभाग इस नीति पर विचार कर रहा है क्योंकि गैस अधिक सस्ती और प्रभावी इधन है।