भारतीय अर्थव्यवस्था मंे सुस्ती के बावजूद परिवारांे द्वारा चलाया जाने वाला कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। पीडब्ल्यूसी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले एक साल मंे 74 प्रतिशत पारिवारिक कंपनियांे मंे वृद्धि दर्ज हुई।
पीडब्ल्यूसी ने 21वीं सदी मंे पारिवारिक कारोबार को बचाव वाला माडल करार दिया है। सर्वेक्षण मंे कहा गया है कि इस तरह का माडल कई प्रकार के लाभ उपलब्ध कराता है। खासकर लचीलेपन, निरंतरता और दीर्घावधि के दृष्टिकोण को लेकर।
यही नहीं पारिवारिक कंपनियांे मंे अन्य की तुलना मंे मूल्य अधिक होते हैं। पीडब्ल्यूसी के पारिवारिक कारोबार सर्वेक्षण 2012 के अनुसार, भारत मंे पिछले एक साल मंे ऐसे 74 प्रतिशत उद्योगांे या कंपनियांे की बिक्री में वृद्धि दर्ज हुई है जिनका संचालन किसी परिवार के हाथ मंे है। इसी मोर्चे पर वैश्विक औसत 65 प्रतिशत बैठता है।
भारत मंे सिर्फ 8 प्रतिशत पारिवारिक कंपनियां ऐसी रही हैं जिनकी बिक्री मंे गिरावट आई है। इसका वैश्विक औसत 19 प्रतिशत है।
पीडब्ल्यूसी इंडिया के कार्यकारी निदेशक इंद्रानीत रॉय चौधरी ने कहा, हमारे सर्वेक्षण से साफ पता चलता है कि भारत मंे परिवारांे द्वारा चलाए जा रहे उद्योग धंधे आर्थिक स्थिति के लिहाज से दुनिया के अन्य देशांे के मुकाबले कम प्रभावित होते हैं।
सर्वेक्षण मंे कहा गया है कि आगे परिदृश्य और बेहतर दिख रहा है। बड़ी संख्या मंे भारत के पारिवारिक कारोबारांे मंे अगले पांच साल मंे आक्रामक वृद्धि देखने को मिलेगी।