| दूध में तेजी की आंच की भी होगी जांच | | रूतम वोरा / अहमदाबाद June 24, 2012 | | | | |
गुटबंदी के लिए सीमेंट कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई के बाद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने अपने आप से पहल करते हुए दूध विक्रेता कंपनियों के खिलाफ जांच का निर्णय लिया है। दूध विक्रेता कंपनियों पर थोड़े समय में ही लगातार कीमतें बढ़ाकर कीमत सांठगांठ करने का आरोप लगाया गया है। प्रतिस्पर्धा नियामक यह जांच करेगा कि देश की दूध कंपनियां और सहकारी संस्थाएं सांठगांठ में तो लिप्त नहीं हैं।
शुक्रवार को अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर सीसीआई के चेयरमैन अशोक चावला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हमने दूध विक्रेता संस्थाओं के खिलाफ जांच का निर्णय लिया है। फिलहाल यह प्रारंभिक चरण में है।' सीसीआई ने औद्योगिक संस्था सीमेंट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) के साथ ही एसीसी, अुंबजा सीमेंट्स, अल्ट्राटेक और जेपी सीमेंट्स समेत 11 प्रमुख सीमेंट कंपनियों पर 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी जुर्माना लगाया है। इसके बाद नियामक के निशाने पर टायर कंपनियां हैं।
चावला ने कहा कि प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन करने पर टायर कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है। उन्होंने कहा, 'रियल एस्टेट, दवा, विमानन, दूरसंचार और टायर उद्योग हमारे निशाने पर हैं। टायर कंपनियों के खिलाफ जांच अग्रिम चरण में पहुंच चुकी है और इस पर निर्णय कभी भी आ सकता है।' चावला ने यह भी संकेत दिया कि आयोग तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोलियम कीमतों में की गई बढ़ोतरी पर भी विचार करेगा।
देश में सरकारी नीति और प्रतिस्पर्धी कानून के बीच दूरी कम करने के लिए प्रतिस्पर्धा पर एक कैबिनेट कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। चावला ने कहा, ' फिलहाल यह प्रस्ताव कैबिनेट के पास है और वह इस पर अंतिम निर्णय लेगा।' सीसीआई के पास प्रतिस्पर्धा अधिनियम के भाग 3 और 4 के उल्लंघन से संबंधित करीब 267 मामले आए हैं। यह मामले बीमा, वाहन, रियल एस्टेट, दवा, वित्तीय सेवाएं और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों के हैं। उन्होंने कहा, 'इनमें से 200 से अधिक मामलों पर हमने अपना अंतिम आदेश दे दिया है, जहां जरूरत थी, वहां जुर्माना लगाया गया है।'
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