| गरीबी घट गई 7 फीसदी | | बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 19, 2012 | | | | |
पहले ही कई मोर्चों पर जूझ रही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के लिए अब ऐसी खबर है, जो अच्छी भी है और बुरी भी। अच्छी खबर यह है कि पिछले पांच साल के दौरान देश में गरीबी 7 फीसदी घटी है और बुरी खबर है कि तेंडुलकर समिति के नए गरीबी अनुमान के आंकड़ों में गरीबी रेखा अब 32 रुपये प्रतिदिन से घटकर 28 रुपये प्रतिदिन हो गई है।
इससे एक बार फिर उस विवाद को हवा मिलेगी, जो योजना आयोग द्वारा उच्चतम न्यायालय में दायर किए गए हलफनामे के बाद शुरू हुआ था। इसमें आयोग ने 2004-05 में गरीबी रेखा 32 रुपये प्रतिदिन तय किए जाने का उल्लेख किया था। आयोग द्वारा आज जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार रोजाना 28 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा से ऊपर है। आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच साल में देश में गरीबी 37.2 फीसदी से 7.4 फीसदी घटकर 29.8 फीसदी पर आ गई है। 2004-05 से 2009-10 के बीच इसमें औसतन 1.46 फीसदी की गिरावट आई है, जो पिछले 10 साल की सालाना गिरावट 0.74 फीसदी से कहीं ज्यादा है। यानी 2004-05 से 2009-10 में करीब 5.25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।
आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच साल के दौरान असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड में गरीबी 10 फीसदी बढ़ी है और ये देश में गरीबी का केंद्र बनकर उभरे हैं। हालांकि पारंपरिक तौर पर गरीब बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में गरीबी के आंकड़ों में मामूली गिरावट आई है। ग्रामीण इलाकों में गरीबी जहां 8 फीसदी घटी है वहीं शहरी इलाकों के लिए यह आंकड़ा 4.8 फीसदी रहा है। शहरी इलाकों में 859.60 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 672.80 रुपये की मासिक आय को नई गरीबी रेखा तय किया गया है। यह 2004-05 में तय की गई गरीबी रेखा से कम है।
योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, 'मेरा मानना है कि जब 2011-12 के आंकड़े आएंगे, तो गरीबी में वास्तविक गिरावट सालाना 1.46 फीसदी से कहीं ज्यादा होगी।' हालांकि केंद्र द्वारा सामाजिक कार्यक्रमों पर किए जा रहे खर्च पर इस रिपोर्ट का कोई असर नहीं होगा।
आयोग के सदस्य अभिजित सेन ने कहा, 'खाद्य सुरक्षा विधेयक जैसे कार्यक्रमों के तहत दी जा रही सरकारी मदद इस गरीबी रेखा पर निर्भर नहीं करेगी।' खाद्य सुरक्षा का अधिकार अभियान चलाने वाले ब्रज पटनायक ने कहा, 'योजना आयोग ने न सिफ उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है बल्कि गरीबों और देश की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ किया है।'
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