| जीएसटी को दो साल की छुट्टी! | | ज्ञान वर्मा और विकास शर्मा / नई दिल्ली/चंडीगढ़ March 19, 2012 | | | | |
प्रस्तावित नई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली की राह आसान होती नहीं दिख रही है। इसे लागू करने की तय अवधि में तीन साल की देरी पहले ही हो चुकी है। हालांकि ज्यादातर राज्य सरकारों का कहना है कि 2014 में आम चुनाव के कारण निकट भविष्य में इसके लागू होने की संभावना कम ही है।
गैर-कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का तो यहां तक कहना है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के मौजूदा कार्यकाल में तो जीएसटी लागू नहीं ही होगा। उधर, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी कहा कि जीएसटी जरूर आएगा लेकिन अभी इसे लागू करने के लिए राजनीतिक हालात सही नहीं हैं। रविवार को हुए एक संवाददाता सम्मेलन में मुखर्जी ने कहा, 'यह ऐसा कदम है, जिसके लिए संवैधानिक संशोधन की जरूरत है। इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की दरकार है।'
संप्रग के वरिष्ठ मंत्रियों ने सभी कांग्रेसी और गैर कांग्रेसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा है कि केंद्र जीएसटी जैसी अन्य बड़े मसलों पर फैसला 2014 के आम चुनाव के बाद ही किया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित एक राज्य के वित्त मंत्री ने बताया, 'संप्रग के नेताओं का कहना है कि बड़े नीतिगत आर्थिक सुधार कार्यकाल के पहले या दूसरे साल में ही लागू हो जाने चाहिए थे। 2013-14 में आम चुनाव होने हैं, तो केंद्र जीएसटी लागू नहीं करेगा क्योंकि इसे पूरी तरह लागू होने में ही दो साल का समय लगेगा। कार्यकाल के आखिरी साल में जीएसटी लागू करने से लोग खफा हो सकते हैं, जिसका असर आम चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।' राज्य सरकारों की चिंता यह है कि उन्हें पहले से ही भारी घाटा हो रहा था और केंद्र ने उन्हें कोई मुआवजा भी नहीं दिया है। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) की क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों को महज 300 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। केंद्र ने दो टूक लहजे में कह दिया है कि 2011-12 के लिए राज्यों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा और इसलिए सीएसटी मुआवजे पर 2012-13 के बजट में भी कुछ नहीं कहा गया है।
बिहार के वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, 'समस्या यह है कि केंद्र सरकार ने बजट में जीएसटी लागू करने के बारे में कोई समयसीमा की घोषणा नहीं की है। पहले केंद्र ने कहा था कि जीएसटी 2011 में लागू होगा, इसके बाद इसे 2012 किया गया। लेकिन इस बार के बजट में जीएसटी पर बिल्कुल चुप्पी साध ली गई है। अब क्योंकि आम चुनाव नजदीक हैं और सरकार के लिए चुनाव से ठीक पहले जीएसटी जैसे अहम सुधार पर फैसला करना मुश्किल होगा। ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार जीएसटी लागू करने के लिए गंभीर नहीं है।'
मोदी ने कहा कि केंद्र ने सीएसटी की दरें 4 से घटाकर 2 फीसदी कर दी हैं और इससे राज्यों को होने वाले घाटे की भरपाई करने के लिए उसने कोई आश्वासन नहीं दिया है। मोदी ने कहा, 'राज्यों ने 2010-11 के लिए 19,000 करोड़ रुपये के दावे किए थे लेकिन महज 6,000 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए। 2011-12 और 2012-13 के लिए भी कोई प्रावधान नहीं किया गया है। यह बेहद गंभीर मसला है और इस पर चर्चा के लिए मैं अधिकार प्राप्त समिति की बैठक बुलाऊंगा।' हालांकि महज भाजपा शासित राज्य ही चिंतित नहीं हैं। कांग्रेस शासित राज्य भी ऐसी ही आशंकाओं से चिंतित हैं। हरियाणा की उत्पाद एवं कराधान मंत्री किरण चौधरी कहती हैं, 'जीएसटी लागू करने से कर चोरी घटेगी और लालफीताशाही पर भी लगाम कसेगी। सबसे बड़ी चिंता इसे लागू करने में हो रही देरी है। सीएसटी में कटौती से राज्य के राजस्व को 2011-12 में करीब 3,000 करोड़ रुपये की चपत लगी है।' मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि जीएसटी निकट भविष्य में लागू होने वाला है।'
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