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आईटी में ड्राइव, शिपिंग की सवारी, वित्त और ऊर्जा पर दांव
बाजार नजरिया
देवांग्शु दत्ता /  March 06, 2011

ढांचागत रूप से बजट में काफी कम बदलाव आया है। इसमें किसी बड़े सुधार की घोषणा नहीं की गई है। कोई बड़ा नया कर नहीं लगाया गया है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने चक्रीय रिकवरी पर दांव खेला है। हालांकि यह एक बड़ा मौका हो सकता था, जिससे सरकार चूक गई है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार अपनी दूसरी पारी के बीच में है  और कुछ नए सुधारों की घोषणा करने का यह एक अच्छा मौका हो सकता था। जिस किसी भी साल बजट में सरकार मौजूदा समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देती है, तो वह विकास एक मौका खो देती है और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से उसका नुकसान ही होता है।

हालांकि वित्त वर्ष 2011-12 के लिए बजट की घोषणा के बाद किसी खास क्षेत्र में निवेश आवंटन बढ़ाने की जरूरत नहीं के बराबर है। बजट पूर्व कॉरपोरेट अनुमानों पर फिर से विचार करने की अब कोई जरूरत नहीं है। देर सवेर जब भी महंगाई का आलम सुधरेगा, उपभोग भी बेहतर हो जाएगा।

अगर एक बार फिर से कीमतों पर नजर डालें तो 21 के पीई पर निफ्टी अब भी आकर्षक नहीं है। यह अब भी पीई 18 के लंबी अवधि (2000-2011) के औसत से काफी अधिक है। अगर ब्याज दरों की आय से तुलना करें तो अब भी गिरावट की गुंजाइश बनती है। हालांकि ईपीएस अनुमानों से यही पता चलता है कि 2011-12 में निफ्टी 15 से 20 फीसदी बढ़ेगा। ऐसे में अगर सूचकांक का यही स्तर बना रहता है तो भी वित्त वर्ष के आखिर तक पीई घटकर 17-18 तक आ जाएगा। इसका मतलब है कि कीमतें अब भी अधिक हैं, हालांकि ये इतनी भी अधिक नहीं हैं कि इन्हें बनाए न रखा जा सके। तो निवेश का मंत्र यही होगा कि सतर्क रहते हुए निवेश जारी रखें। मेरा व्यक्तिगत सुझाव यही होगा कि लंबी अवधि के लिए बड़ा निवेश करने से पहले निफ्टी को 5,000 से नीचे आने देना चाहिए। पर अगर आप निफ्टी के 5,500 के स्तर से डावर्सिफाइड इक्विटी फंडों में एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो 2 से 3 साल बाद आपको बढिय़ा रिटर्न मिल सकता है। मैं पहले भी कैसिनो के अंदाज में एसआईपी लेने का सुझाव दे चुका हूं। दांव लगाने वाले ज्यादातर लोग नुकसान के बाद हिस्सेदारी बढ़ाते हैं। तो जब बाजार में गिरावट का रुख हो तो एसआईपी के जरिए निवेश बढ़ाना एक अच्छी रणनीति हो सकती है। इससे आपकी खरीदारी की लागत घटती है। बजट के बाद भी इस रणनीति पर अमल करें और अगर निफ्टी में 10 से 20 फीसदी या इससे अधिक की गिरावट देखने को मिलती है तो एसआईपी की किस्त बढ़ाने को तैयार रहें। आप चाहें तो अब इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी अपना निवेश बढ़ा सकते हैं। इसलिए नहीं कि बजट में इस ओर खास ध्यान दिया गया है, बल्कि इसलिए क्योंकि पिछले कुछ सालों के दौरान इस क्षेत्र ने काफी लोकप्रियता खोई है। जनवरी 2010 से ही निफ्टी लगभग स्थिर रहा है (इसने 6 फीसदी की दर से तेजी दिखाई है जिसकी तुलना में महंगाई काफी अधिक है) और सीएनएक्स इन्फ्रा 19 फीसदी घटा है। अगर यह थोड़ी सी भी वापसी करता है तो अगले एक दो सालों में आउटपरफॉर्मर साबित हो सकता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश का सबसे सही तरीका बेंचमार्क इन्फ्रा-बीईईएस ईटीएफ में एसआईपी के जरिए पैसा लगाना हो सकता है। अगर सीएनएक्स इन्फ्रा में गिरावट जारी रहती है तो दूसरे किसी डायवर्सिफाइड इक्विटी फंडों की तरह ही अपने एसआईपी निवेश की किस्त बढ़ा दें।

कुछ और क्षेत्रों पर भी मेरी नजर है। इनमें से एक आईटी भी है। इस क्षेत्र का प्रदर्शन वैश्विक आर्थिक प्रदर्शन पर ही निर्भर करेगा। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से वापसी करती है तो वहां आईटी पर खर्च का बजट भी बढ़ेगा और इस तरह राजस्व विस्तार होगा।

शिपिंग सेक्टर पर भी ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यह भी घरेलू कारकों के बजाय वैश्विक कारकों पर अधिक निर्भर करता है। अगर शिपिंग में सतत रिकवरी रहती है तो इससे ट्रेड रिकवरी का संकेत मिलेगा। बजट अनुमानों के पूरा होने की संभावना बढ़ेगी और व्यापार एवं निर्यात आधारित दूसरे उद्योग भी दमदार प्रदर्शन करेंगे।
वित्तीय सेक्टर पर भी विशेष रूप से मेरी नजर रहेगी। बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर बैंकिंग, एनबीएफसी और आवासीय वित्तीय कंपनियों पर देखने को मिला है। फिलहाल महंगाई बहुत अधिक है, पर जब भी यह नियंत्रण में आएगी तो इसका असर इन क्षेत्रों के शेयरों पर देखने को मिलेगा।

ऊर्जा क्षेत्र पर भी ध्यान दिया जा सकता है। सरकार को इस क्षेत्र के लिए जल्द ही सब्सिडी से जुड़े कड़े फैसले लेने होंगे। अरब देशों में व्याप्त असंतोष के बीच पहले ही कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल 115 डॉलर से ऊपर जा चुकी हैं और इसमें और बढ़ोतरी होने की आशंका है। कच्चे तेल की कीमतें कम हुए बिना महंगाई में खासी कमी की उम्मीद करना बेमानी है। साथ ही अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई रहती हैं तो बजटीय वित्तीय घाटा के अनुमानों को पूरा कर पाना भी संभव नहीं है।

इन 4 क्षेत्रों में निवेश सुझाव देना तो मुश्किल है क्योंकि कारोबारी माहौल कई बार समीकरण बदल देते हैं। इनमें खरीद/बिक्री की सलाह देने से बेहतर है इन पर निगरानी रखने की सलाह दी जाए। आप इन क्षेत्रों पर नजर बनाए रखेंगे तो आपके लिए खुद-ब-खुद निवेश का फैसला लेना आसान हो जाएगा।

Keyword: pranab mukharji,
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