, 27 जुलाई
बीरभूम जिले के इस कस्बे में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, कोकराझार और अन्य क्षेत्रों में दंगे भड़कने के बाद असम की सीमा पार करके शरणार्थी पश्चिम बंगाल आ गये हैं। हमें उन्हें अपने भाई एवं बहनों की तरह शरण देनी चाहिए। हम उनकी सर्वोत्तम देखभाल करेंगे।
उन्होंने कहा, ये बेघर लोग अलीपुरद्वार, कुमारग्राम और जलपाईगुड़ी के अन्य इलाकों में आ गये हैं। हम लोग उनकी देखभाल करेंगे और अपने मेहमानों की तरह उनका सम्मान करेंगे।
ममता ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दस दिनों में जिम्मेदारी से काम किया है तथा कोई बयानबाजी न करके बेघर लोगों को शरण देने के प्रयास किये।
मुख्यमंत्री ने कहा, हम मानते हैं कि शरणार्थियों की देखभाल करना व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी है। लेकिन हम माकपा को शरणार्थियों की पीड़ा को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कभी इजाजत नहीं दे सकते।
उन्होंने साथ ही यह भी कहा, दंगे खतरनाक होते हैं। कोई इन्हें नहीं चाहता। हम किसी दंगाई को कभी समर्थन नहीं देंगे।
माकपा पर असम शरणार्थी मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि माक्र्सवादियों की दंगों को भड़काने की योजना है।