दिल्ली लोकायुक्त ने एक जांच से जुड़े मूल दस्तावेज पेश किए जाने के अपने आदेश का पालन नहीं करने पर नगर के शहरी विकास विभाग की आज खिंचाई की।
यह मामला कुछ अनधिकृत कालोनियों में विकास कार्य के लिए मंत्रिमंडल के फैसले में कथित तौर पर छेड़छाड़ की जांच से संबंधित है।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति मनमोहन सरीन ने एक आदेश में मूल मंत्रिमंडल नोट और अन्य दस्तावेज पेश करने के लिए सरकार को 10 दिनों का समय दिया। उन्होंने शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो दंडात्मक कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
लोकायुक्त उस शिकायत पर जांच कर रहे हैं जिसमें कहा गया है कि मंत्रिमंडल के 20 नवंबर 2007 के एक फैसले में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर 11 अनधिकृत कालोनियों में विकास कार्य कराए गए।
लोकायुक्त ने इस संबंध में 13 जुलाई को शहरी विकास विभाग को मूल फैसला और कुछ अन्य दस्तावेज पेश करने को कहा था।
शहरी विकास विभाग में उप सचिव धरम पाल शर्मा औैर अधीक्षक नागेश कुमार लोकायुक्त के समक्ष आज उपस्थित हुए और 20 नवंबर के फैसले की छायाप्रति पेश किए। लेकिन वे अन्य दस्तावेज नहीं सौंप सके और कहा कि वे दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं।