बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकारी तेल कंपनियों के लिए बेहतर दौर की शुरुआत
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सरकारी तेल कंपनियों के लिए बेहतर दौर की शुरुआत
बाजार नजरिया : आरआईएल और आरएनआरएल के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों के क्षेत्र की गैस की कीमतें बढ़ा दी हैं
देवांग्शु दत्ता /  May 24, 2010

रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस नैचुरल रिर्सोसेज (आरआईएल-आरएनआरएल) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अंबानी साम्राज्य पर व्यापक असर पड़ने के अलावा ऊर्जा उद्योग पर भी असर पड़ा। इस फैसले से सरकार को गैस की कीमतें तय करने का अधिकार मिल गया।

सरकार ने ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के तेल क्षेत्रों की गैस कीमतें तय करने के लिए तार्किक कदम उठाया और यह पहले के 1.82 डॉलर से ज्यादा है। सरकार ने फैसला लेने से पहले खरीद के लिए कोटा निर्धारण तय किया और खाद उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्राथमिकता तय की। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क की शुरुआत हुई।

प्राकृतिक गैस का दुनिया में कारोबार उसी कीमत पर होता है जो कच्चे तेल से जुड़ी हुई है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो प्राकृतिक गैस में भी तेजी आती है। हालांकि परिवहन और दूसरी तकनीकी दिक्कतों की वजह से स्थानीय स्तर पर कीमतों में काफी अंतर आता है।

भारत में ब्रिटिश परिचालित पन्ना, मुक्ता और ताप्ती क्षेत्र के गैस की बिक्री 5.73 डॉलर पर होती है जबकि केयर्न रावा गैस क्षेत्र की कीमत 5.5 डॉलर के हिसाब से तय होती है। फिलहाल प्राकृतिक गैस की अनुबंध की कीमतें नाईमैक्स पर 4.2 डॉलर है। विकसित देश कई तरह के आर्थिक संकटों से जूझ रहे हैं। ऐसे में कच्चे तेल की मांग में कमी आने से इसमें लघु अवधि में गिरावट की उम्मीद है।

पिछले 10 सालों में प्राकृतिक गैस की कीमतें 5 डॉलर से ऊपर रही हैं और इसका दायरा 6 डॉलर और 10 डॉलर के बीच है। वर्ष 2008 के मध्य में तब यह 13 डॉलर हो गईं जब कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर से ऊपर चली गईं। दूसरी ओर 1990 से प्राकृतिक गैस की कीमतें 4 डॉलर से नीचे तो कभी 2 डॉलर से नीचे रहीं। इस दशक में कच्चे तेल की कीमतें सामान्यतौर पर 40 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहीं।

इसी वजह से प्राकृतिक गैस की कीमतों में कच्चे तेल की तरह  अस्थिरता है। कुछ वर्षों में कच्चे तेल की तुलना में भारत के पास घरेलू मांग के मुकाबले अतिरिक्त प्राकृतिक गैस है। सरकार के पास पर्याप्त मौके हैं कि वह अपनी वित्तीय स्थिति को नुकसान पहुंचाए बिना भी कीमतों को बेहतर कर पाए। उसी तरह से कच्चे तेल की गलत कीमतें तय करने और सब्सिडी  से परेशानियां बढ़ेंगी।

केजी बेसिन की डी6 ब्लॉक से तेल निकालने की प्रक्रिया 4.2 डॉलर के साथ मुनाफादायक है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें मांग की वजह से तय की जाती हैं न कि इन्हें निकालने की लागत के आधार पर।

सऊदी अरब और कुवैत का तेल 15 डॉलर प्रति बैरल के साथ लाभदायक होगा। पांच साल की अवधि के लिए यह 4.2 डॉलर कुछ वक्त के लिए सस्ती लग सकती है। जब तक विश्व अर्थव्यवस्था में कोई आर्थिक मंदी और 1990 जैसे हालात न आएं, तब तक यह महंगी नहीं लगेगी।

बाजार की अस्थिरता से जुड़ी प्रणाली का इस्तेमाल करने के बजाय सरकार लंबी अवधि के लिए कीमतें तय करने के लिए फैसला ले सकती है। पांच साल की अवधि के दौरान ऊर्जा उत्पादन क्षमता, नया खाद संयंत्र, सीजीडी नेटवर्क स्थिर गैस कीमतों के अनुमान पर ही बनाया जाएगा।

नए बाजारों में गैस निकालने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क बनाया जाएगा। यह निवेश एक सकारात्मक सोच के साथ किया जा रहा है जिससे वृद्धि की राह तैयार होगी। हालांकि इन उद्योगों का अभी प्रारूप तैयार किया जा रहा है और परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही हैं। अगले 2-3 सालों में इनमें तेजी आएगी।

सभी नए संयंत्रों को कीमतों के बदलाव की गुंजाइश बनानी होगी। कुछ चरणों में लॉबिंग करना अच्छा नहीं होगा। अगर कीमतों में तेजी आती है तो आरआईएल और तेल अन्वेषण और उत्पादन से जुड़े दूसरे खिलाड़ी बाजार के हिसाब से कीमतें तय करने के लिए लॉबिंग करेंगे।

ऊर्जा उद्योग कई फैसले ऑप्शन कीमतों के हिसाब से लेता है और दुनिया भर में कीमतों की अस्थिरता के अनुमान के हिसाब से परियोजनाएं ली जाती है। मौजूदा नीति में दिक्कत यही है कि यह नीति बाजार से जुड़ी हुई नहीं है और कई परियोजनाएं भी ऐसी ही होंगी।

गैस निकालने के तंत्र की बात की जाती है और यह बाजार की कीमतों से जुड़ा होगा लेकिन जब तक ऐसा समय नहीं आता तब तक इसके लिए कोई अनुमान लगाना मुश्किल होगा। लघु अवधि में ओएनजीसी और ओआईएल को ज्यादा फायदा पाना चाहिए।

आरआईएल को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। एनटीपीसी और दूसरे बिजली उत्पादक गैस आधारित संयंत्रों के साथ इन कीमतों को आधार बनाकर कारोबारी योजनाएं बनाएंगे। हमें यह देखना होगा कि अंबानी बंधु फिर से बातचीत में क्या करते हैं।

Keyword: market outlook, supreme court, RIL, RNRL,
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