मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को लिखे एक पत्र में कहा कि यह मुद्दा काफी समय से लंबित है। लगातार नुकसान होने के कारण आठ वर्ष पहले मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम को बंद करने का फैसला किया गया था।
उन्होने कहा कि निगम में केन्द्र सरकार की 29 प्रतिशत भागीदारी है, लिहाजा इसे बंद करने के लिए केन्द्र सरकार से सहमति मांगी गई थी। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 23 मार्च 2005 को सहमति दे दी और केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने निगम के कर्मचारियों द्वारा वीआरएस लिये जाने से होने वाले खर्च की पूर्ति के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार की वित्तीय सहायता तथा अपने स्वयं के बजट से राज्य सरकार ने निगम के 11 हजार कर्मचारी में से 10 हजार 502 को वीआरएस लेने के लिए तैयार किया। लगभग 200 कर्मचारियों को उनके कमजोर काम के कारण सेवा से पृथक किया गया। इस तरह निगम को अंतिम रुप से बंद करने की कार्यवाही की गई।
जारी .भाषा. सिन्हा