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Coding Agents का बढ़ता जलवा, क्या अब इंजीनियरों की जरूरत होगी खत्म? Datadog CTO ने बताया AI का असली असर

Coding Agents सॉफ्टवेयर बनाने की रफ्तार बढ़ा रहे हैं, लेकिन Datadog CTO के मुताबिक इंजीनियरों की जरूरत खत्म होने के बजाय उनका काम और जटिल हो सकता है।

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अविक दास   
Last Updated- August 10, 2026 | 9:45 AM IST

क्लाउड-आधारित मॉनिटरिंग और डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म प्रदाता अमेरिकी कंपनी डेटाडॉग के भारत में लगभग 100 कर्मचारी हैं, जो बिक्री, समाधान, इंजीनियरिंग और मार्केटिंग जैसे विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एलेक्सिस ली क्वोक ने न्यूयॉर्क से अभीक दास के साथ बातचीत में आधुनिक सॉफ्टवेयर की जटिलताएं, कोडिंग एजेंटों के प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कोडिंग एजेंटों के बढ़ते प्रभाव की वजह से इस की संभावना कम है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जरूरत कम हो जाएगी। बातचीत के अंश …

डेटाडॉग खुद को क्लाउड-बेस्ड मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म बताती है। उद्यमों के लिए आप किन मुख्य मानकों को देखते हैं?

हमने लगभग 16 साल पहले क्लाउड के दौर की शुरुआत में काम शुरू किया था। उस समय हमारा मकसद कंपनियों को उनके क्लाउड इस्तेमाल को समझने में मदद करना था, क्योंकि हर स्तर पर इसकी पूरी जानकारी का अभाव था। एआई के मामले में भी कहानी कुछ वैसी ही है। इसमें भी स्पष्टता की भारी कमी है, जबकि एआई में बहुत ज्यादा क्षमताएं भी हैं। इसी वजह से ग्राहकों में काफी चिंता है और हमारे लिए यह मौका है कि हम उन्हें एआई एप्लीकेशन की परफॉर्मेंस, सिक्योरिटी और लागत से जुड़ी हर चीज पर दृश्यता और नियंत्रण दे सकें।

आपके सह-संस्थापक ओलिवियर पोमेल अक्सर इस बारे में बात करते रहे हैं कि मॉडर्न सॉफ्टवेयर कितना जटिल हो गया है। सॉफ्टवेयर में एआई की वजह से कौन-सी जटिलताएं पैदा हुई हैं?

इसके कुछ पहलू हैं। एक तो एआई है, जिससे हम ज्यादा सॉफ्टवेयर बना सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि उन्हें मैनेज करने के लिए हमारे पास अधिक लोग हों। इसलिए, एक समय ऐसा आ सकता है जब सॉफ्टवेयर की मात्रा इतनी बढ़ जाए कि सही टूल्स के बिना उसे संभालना बहुत मुश्किल हो जाए और हम उसे बनाए न रख पाएं। दूसरा पहलू यह है कि चूंकि सॉफ्टवेयर एआई का इस्तेमाल कर सकता है, इसलिए टेक्नॉलजी से पारंपरिक सॉफ्टवेयर में जो बदलाव आता है, वह पहले देखे गए बदलाव से काफी अलग होता है। पहले सॉफ्टवेयर का कार्य पूरी तरह से तय होता था, आप कोड लिखते थे और आपको पता होता था कि वह क्या करेगा।

लेकिन अब, हमारे पास ऐसे मॉडल हैं जो असल में स्टैटिस्टिकल (सांख्यिकीय) हैं। इसलिए, कई ऐसी तकनीकें हैं जिनसे आप आम तौर पर सिस्टम के व्यवहार को अपनी मर्जी के मुताबिक ढाल सकते हैं। लेकिन आपको कभी भी गणित के तौर पर पक्की गारंटी नहीं मिलती। इस वजह से, इससे कोई निश्चित व्यवहार नहीं बनता। यह इतना जटिल है कि इंसान इसे बस अपनी आंखों से देखकर नहीं समझ सकता।

एआई ने कोडिंग पर क्या असर डाला है?

पिछले साल, कोडिंग एजेंटों की सॉफ्टवेयर लिखने की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। वे अब ऐसी जटिलता वाला सॉफ्टवेयर बना सकते हैं जो इंसानी क्षमता के बराबर या कभी-कभी उससे भी बेहतर होता है। उदाहरण के लिए, हमारे पास ऐसे प्रोजेक्ट रहे हैं जिनमें हमने बहुत कुशल लोगों या अच्छी तरह से परिभाषित समस्याओं या सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर पर कुछ सौ डॉलर खर्च करके ऐसे सिस्टम बनाए हैं, जिन्हें बनाने में तीन बहुत माहिर इंजीनियरों को छह महीने लग जाते। यह काम एक व्यक्ति और एक कोडिंग एजेंट की मदद से कुछ ही सप्ताहों में हो गया। इसका मतलब यह नहीं है कि अचानक मुझे 10 इंजीनियरों की जगह सिर्फ एक इंजीनियर की जरूरत है। कोडिंग एजेंट सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर के किसी एक छोटे हिस्से को लेने और उसे बहुत बेहतर बनाने में वाकई बहुत अच्छे होते हैं। लेकिन सॉफ्टवेयर बनाने की असलियत यह है कि यह कई टीमों की मिली-जुली कोशिश होती है, जिसमें अलग-अलग ऑपरेटिंग रोडमैप, काम की रफ्तार और प्राथमिकताएं होती हैं। ऐसे में कोडिंग एजेंट इन चीजों को खत्म नहीं करते। वे मौजूद कुछ दिक्कतों को और बढ़ा देते हैं।

First Published : August 10, 2026 | 9:45 AM IST