बचाव पक्ष के वकीलों अमीन सोल्कर, फरहाना शाह और अब्बास काजमी ने फांसी को लेकर बरती गयी गोपनीयता पर सवाल उठाये।
बचाव पक्ष के वकील आमिन फरहाना शाह ने कहा, मुझे सदमा लगा। यह सब अचानक हुआ। इतनी गोपनीयता के साथ फांसी क्यों दी गयी।
वहीं, सोल्कर ने कहा, यह अच्छी बात है कि सरकार ने इस मामले में तत्परता दिखायी क्योंकि समाज और पीडि़तों के हित में ऐसा करना जरूरी है । हो सकता है कि इतने समय तक उसकी सुरक्षा व्यवस्था सरकारी खजाने के लिए बोझ बन गया हो। लेकिन गोपनीयता क्यों बरती गयी।
सोलकर ने हालांकि कहा कि यह अच्छी बात है कि सरकार ने तेजी से काम किया।
दोनों ने उच्च न्यायालय में कसाब का बचाव किया था। दोनों को अदालत में आरोपी की ओर से पेश होने के लिए नियुक्त किया गया था।
सत्र अदालत में कसाब की ओर से पेश हुए काजमी ने कहा कि हो सकता है कि सरकार ने कसाब की दया याचिका को बिना बारी के लिया हो, क्योंकि यह एक असाधारण मामला है।
उन्होंने कहा, इस मामले के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी होंगे। आम आदमी इस फांसी का इंतजार कर रहा था। पीडि़तों को भी अब कुछ राहत मिलेगी।
कसाब को 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले के चार साल बाद आज पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गयी। सत्र न्यायालय ने मई 2010 में कसाब को मौत की सजा सुनायी थी। बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल फरवरी में इस सजा की पुष्टि की थी। बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी। राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते ही उसकी दया याचिका को खारिज किया था।
भाषा
दीपक सुजाता प्रादे81
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