उन्होंने कहा है कि सरकार इस संबंध में मूल जमीन अधिग्रहण पुनर्वास और पुनरुद्धार विधेयक 2011 की सिफारिश को लागू करें जिसके तहत जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया है लेकिन भौतिक कब्जा नहीं हुआ है उसे रद्द कर दिया जाना चाहिये।
जमीन के मुआवजे पर किसानों ने सुझाव दिया कि गरीब किसानों को उचित न्यायसंगत व्यवहार के लिये पास के आवासीय सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिये । उन्होंने कहा कि मुआवजे को जमीन मालिकों के घर पर दिया जाना चाहिये और उन्हें इसके लिये सरकारी अधिकारियौं के चक्कर नहीं लगाने पडे़ इसकी व्यवस्था की जानी चाहिये । मुआवजा एक तय समय सीमा के अंतर्गत दिया जाना चाहिये ।
उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा और दिल्ली में प्रचलित जमीन बैंक जैसी संकल्पना पूरी दुनिया में कहीं नहीं है । यह बेहद खतरनाक और किसान विरोधी है । यह अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है ।
उल्लेखनीय है कि मंत्रियों के एक समूह ने कुछ दिन पहले ही परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के नए कानून के प्रस्तावों पर तीखे मतभेदों को पीछे छोड़ भूमि अधिग्रहण विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी थी। अब यह विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है।
भाषा