उच्चतम न्यायालय ने आज पूंजी बाजार नियामक सेबी से कड़े शब्दों में कहा है कि निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपए वापस लौटाने और इससे जुड़े सारे दस्तावेज मुहैया कराने के न्यायिक आदेशों का पालन नहीं करने पर वह सहारा समूह के खिलाफ कार्रवाई करे।
न्यायालय की पीठ ने नियामक से कहा दस दिन का समय दिया गया था। आप सेबी अधिनियम के तहत अपनी कारवाई कीजिये। कानून के अनुसार आप जो कुछ करना चाहते हैं वह कीजिये। इस संबंध में आप :31 अगस्त के: निर्णय से निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने अपने 31 अगस्त के फैसले में आम निवेशकों से धन जुटाने के मामले में नियमों का उल्लंघन करने पर सहारा समूह की कंपनियों ..सहारा इंडिया रीएल एस्टेट कार्पोरेशन :एसआईआरईसी: और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कार्पोरेशन :एसएचआईसी: ... के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की थी।
फैसले में कहा गया था कि इस तरह के अपराधों को कड़ाई के साथ निपटा जाना चाहिये। आदेश में सेबी को निर्देश दिया गया था कि यदि कंपनियां धन की वापस करने में असफल रहती हैं तो वह उनकी संपत्तियां कुर्क कर सकता है और बैंक खातों को जब्त कर सकता है।
सहारा समूह की इन दोनों कंपनियों ने पूर्ण परिवर्तनीय णपत्रों के जरिये निवेशकों से धनराशि जुटाई थी।
न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने कहा कि यह स्पष्ट तौर पर कंपनियों द्वारा उसके आदेश का उल्लंघन का मामला है। कंपनियां तय समयसीमा के भीतर जुटाई गई राशि वापस करने और निवेशकों से जुड़े दस्तावेज सेबी को उपलब्ध कराने में असफल रही हैं।
पीठ ने कहा हमने अपने आदेश में सब कुछ कहा है। इसका भी उल्लेख किया गया है कि आदेश का पालन नहीं होने के परिणाम क्या होंगे।
जारी भाषा
महावीर रमण अर्थ131
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नननन