Advertisement
भारत में मेमोरी चिप निर्माण में बढ़ सकता है निवेश, उत्पादन बढ़ाएंगी मौजूदा कंपनियां : वैष्णवUpcoming IPO: मेनबोर्ड IPO पर ब्रेक; SME सेगमेंट में 4 नए इश्यू खुलेंगे, 3 लिस्टिंग भी तयMarket Outlook: महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर निर्णय से तय होगी शेयर बाजार की चालFPI की बिकवाली जारी, 2026 में अब तक शेयर बाजार से ₹2.87 लाख करोड़ निकाले100% एथेनॉल फ्यूल को कानूनी मंजूरी, ₹22 लाख करोड़ का आयात बिल कम करने की ओर बड़ा कदमटॉप-10 कंपनियों में से 8 का मार्केट कैप ₹1.90 लाख करोड़ बढ़ा, ICICI बैंक सबसे आगे₹5 लाख करोड़ वैल्यूएशन वाले NSE IPO को मिली रफ्तार, अगले हफ्ते फाइल हो सकता है DRHPईरान के इनकार के बावजूद ट्रंप बोले- आज होगा अमेरिका-ईरान समझौता, सबके लिए खुल जाएगा होर्मुजरूसी तेल पर भारत का भरोसा कायम, मई में आयात 21% बढ़ाG7 Summit में भारत-अमेरिका संबंधों पर नजर, PM मोदी और ट्रंप करेंगे द्विपक्षीय वार्ता
अन्य समाचार सहारा समूह की कंपनियों के खिलाफ कारवाई की सेबी को पूरी छूट .. उच्चतम न्यायालय
'

सहारा समूह की कंपनियों के खिलाफ कारवाई की सेबी को पूरी छूट .. उच्चतम न्यायालय

PTI

- October,20 2012 12:35 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने आज पूंजी बाजार नियामक सेबी से कड़े शब्दों में कहा है कि निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपए वापस लौटाने और इससे जुड़े सारे दस्तावेज मुहैया कराने के न्यायिक आदेशों का पालन नहीं करने पर वह सहारा समूह के खिलाफ कार्रवाई करे।

न्यायालय की पीठ ने नियामक से कहा दस दिन का समय दिया गया था। आप सेबी अधिनियम के तहत अपनी कारवाई कीजिये। कानून के अनुसार आप जो कुछ करना चाहते हैं वह कीजिये। इस संबंध में आप :31 अगस्त के: निर्णय से निष्कर्ष निकाल सकते हैं।

उच्चतम न्यायालय ने अपने 31 अगस्त के फैसले में आम निवेशकों से धन जुटाने के मामले में नियमों का उल्लंघन करने पर सहारा समूह की कंपनियों ..सहारा इंडिया रीएल एस्टेट कार्पोरेशन :एसआईआरईसी: और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कार्पोरेशन :एसएचआईसी: ... के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की थी।

फैसले में कहा गया था कि इस तरह के अपराधों को कड़ाई के साथ निपटा जाना चाहिये। आदेश में सेबी को निर्देश दिया गया था कि यदि कंपनियां धन की वापस करने में असफल रहती हैं तो वह उनकी संपत्तियां कुर्क कर सकता है और बैंक खातों को जब्त कर सकता है।

सहारा समूह की इन दोनों कंपनियों ने पूर्ण परिवर्तनीय णपत्रों के जरिये निवेशकों से धनराशि जुटाई थी।

न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने कहा कि यह स्पष्ट तौर पर कंपनियों द्वारा उसके आदेश का उल्लंघन का मामला है। कंपनियां तय समयसीमा के भीतर जुटाई गई राशि वापस करने और निवेशकों से जुड़े दस्तावेज सेबी को उपलब्ध कराने में असफल रही हैं।

पीठ ने कहा हमने अपने आदेश में सब कुछ कहा है। इसका भी उल्लेख किया गया है कि आदेश का पालन नहीं होने के परिणाम क्या होंगे।

जारी भाषा

महावीर रमण अर्थ131

10192128 दि

नननन

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement