उन्होंने कहा कि देश की केवल दो प्रतिशत बिजली की जरूरत परमाणु उर्जा से पूरी होती है। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि हर जागरक भारतीय नागरिक इस बात पर सहमत होगा कि यह स्वीकार्य नहीं है।
मुखर्जी ने यहां भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र प्रशिक्षण स्कूल के 56वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उक्त विचार रखे।
उन्होंने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह द्वारा देश का बहिष्कार समाप्त करने के लिए किये गये प्रयासों पर और अमेरिका के साथ और बाद में अन्य देशों के साथ असैन्य परमाणु करार पर दस्तखत करने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रयासों की सराहना की।
परमाणु उर्जा की वकालत करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि स्वच्छ उर्जा के लिए हमें परमाणु उर्जा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मुखर्जी ने कहा कि देश में 56 लाख मिलियन यूनिट बिजली की कमी है और एक चौथाई घरों में अब भी बिजली नहीं है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु उर्जा समुदाय को इस तरह की उर्जा के बारे में लोगों की आशंकाओं और चिंताओं को दूर करने के प्रयास करने चाहिए।