नयी दिल्ली, 22 सितंबर :भाषा: दवाओं के परीक्षण के चक्कर में भारत में हर दो दिन में तीन लोगों की मौत की रिपोर्ट के बीच औषधि परीक्षण करने वाली संस्थाओं एवं परीक्षकों को प्रायोजक के साथ किये गए अनुबंध तथा प्राप्त होने वाली फीस, मानदेय, एवं भुगतान से जुड़ी जानकारी देने को कहा गया है।
क्लिनिकल ट्रायल के आवेदकों के लिए जारी आदेश में औषधि नियंत्रक महानिदेशक डा. जी एन सिंह ने कहा कि ड्रग्स एंड कास्मेटिक नियमों के तहत किसी नये दवा का परीक्षण नियम 21 के उपबंध :बी: के अनुरूप ही किया जा सकता है और इसके लिए लाइसेंस प्रदान करने वाले प्राधिकार से लिखित में अनुमति लेनी होगी।
दिशानिर्देशों में कहा गया है कि औषधि परीक्षण से जुड़े प्रायोजकों को परीक्षण शुरू करने के लिए संस्थाओं और परीक्षकों के साथ औपचारिक रूप से कानूनी समझौता या अनुबंध करना होगा। अनुबंध में परीक्षक और प्रयोजक के संबंधों का खुलासा करना होगा।
आदेश में कहा गया है कि, औषधि परीक्षण करने वाले संस्थाओं एवं परीक्षकों को प्रायोजक के साथ किये गए अनुबंध तथा प्राप्त होने वाली फीस, मानदेय, एवं भुगतान संबंधी जानकारी देनी होगी।
औषधि नियंत्रक महानिदेशक ने कहा कि यह निर्णय किया गया है कि परीक्षक को औषधि परीक्षण के लिए किये गए भुगतान की जानकरी उपलब्ध करानी होगी।
औषधि परीक्षण के आवेदकों से ग्यापन के साथ उपरोक्त सूचना संलग्न करने को कहा गया है।
इस बीच, बिना उपयुक्त मंजूरी के भारत में नयी दवा के सुरक्षा और प्रभाव को साबित करने के लिए औषधि निर्माता सामने नहीं आ रहे हैं । देश के शीर्ष दवा नियामक ने ऐसे सभी उत्पादकों से निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करने या दवा पर प्रतिबंध का सामना करने को तैयार रहने को कहा है।