योगेन्द्र ने कहा कि यह फैसला नये तरह का चलन स्थापित करेगा और स्वायत्त निकायों को स्वतंत्र तरीके से कामकाज करने से रोकेगा।
आम आदमी पार्टी के सदस्य ने भाषा से कहा, स्वतंत्रता के बाद जाने माने बौद्ध शिक्षाविद आचार्य नरेन्द्र देव को दो विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया था जबकि वे उस समय विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे । उस समय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसके लिए नरेन्द्र देव को तैयार किया था।
उन्होंने कहा, तब से अब तक दलगत राजनीति के स्वरूप में काफी बदलाव आया है लेकिन मेरा मानना है कि उनकी :नेहरू: विरासत के उत्तराधिकारियों को इसे खत्म करने का काम नहीं करना चाहिए।
योगेन्द्र ने कहा कि इससे ऐसा संदेश जायेगा कि कोई भी स्वतंत्र सदस्य जो किसी स्वायत्त निकाय में मंत्रालय के क्रियाकलापों से असहमत होगा, उसे बाहर निकाल दिया जायेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से वह आयोग की कई बैठकों में कामकाज पर असहमति व्यक्त कर चुके थे जिसमें 11 मार्च 2013 को विदेशी संस्थाओं से समझौते की न्यूनतम पात्रता का विषय शामिल है।
योगेन्द्र ने कहा कि उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति की पात्रता के संबंध में यूजीसी के नियमन में संशोधन के मंत्रालय के प्रस्ताव से भी असहमति व्यक्त की थी। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय समेत केंद्रीय विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में रिक्तियों के विषय को भी उठाया था।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भावना से प्रेरित फैसला है।
जारी भाषा दीपक
नननन